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समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट
समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट
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होर्मुज स्ट्रेट मे तनाव : ईरान ने उतारी ‘फारस खाड़ी की डॉल्फिन’ पनडुब्बियां, अमेरिकी जहाजों पर रहेगी नज

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपनी खास हल्की पनडुब्बियां “फारस खाड़ी की डॉल्फिन” तैनात कर दी हैं। ईरानी नेवी के अनुसार ये पनडुब्बियां दुश्मन जहाजों और युद्धपोतों को ट्रैक करने के साथ जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के चलते क्षेत्र में टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

कीर्तिमान नेटवर्क
10 May 2026, 08:02 PM
तेहरान

पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। इसी बीच ईरान ने अपनी विशेष हल्की पनडुब्बियों को रणनीतिक जलक्षेत्र में तैनात कर दिया है। “फारस खाड़ी की डॉल्फिन” कही जाने वाली ये पनडुब्बियां दुश्मन जहाजों और युद्धपोतों की निगरानी करने के साथ जरूरत पड़ने पर हमला करने में भी सक्षम बताई जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम न केवल होर्मुज स्ट्रेट में जारी सैन्य तनाव को और बढ़ा सकता है, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी गहरा असर डाल सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों जरुरी 

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा समझा जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से में पहुंचने वाला कच्चा तेल और गैस इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन लाखों बैरल तेल इस जलमार्ग के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव ने पकड़ी रफ्तार

हाल के दिनों में अमेरिकी नेवी द्वारा ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने और समुद्री गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। सीजफायर जैसे हालात होने के बावजूद अमेरिका और ईरान दोनों अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने में लगे हुए हैं।

होर्मुज स्ट्रेट के आसपास दोनों देशों की नौसेनाओं की गतिविधियां बढ़ने से क्षेत्र में पहले ही भारी तनाव बना हुआ था। अब ईरान द्वारा हल्की पनडुब्बियों की तैनाती ने इस तनाव को और गंभीर बना दिया है।

ईरानी नेवी का बड़ा ऐलान

ईरानी नौसेना के कमांडर शाहराम ईरानी ने रविवार को घोषणा की कि “फारसी खाड़ी की डॉल्फिन” नाम से पहचानी जाने वाली स्वदेशी हल्की पनडुब्बियों को होर्मुज स्ट्रेट में तैनात कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते खतरों, सुरक्षा जरूरतों और ऑपरेशनल रणनीति को ध्यान में रखते हुए इन पनडुब्बियों की तैनाती और विस्तार किया जा रहा है।

ईरानी अधिकारियों का दावा है कि ये पनडुब्बियां विशेष रूप से संकरे समुद्री क्षेत्रों में तेजी से संचालन करने और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तैयार की गई हैं।

हर समय अलर्ट मोड में रहेंगी पनडुब्बियां

हल्की पनडुब्बियां हर समय अलर्ट पर रहती हैं और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने में सक्षम हैं। बताया जा रहा है कि ये पनडुब्बियां समुद्र की सतह के नीचे लंबे समय तक “बॉटम रेस्ट” स्थिति में रह सकती हैं। इसका मतलब है कि वे समुद्र तल के पास लंबे समय तक छिपकर दुश्मन जहाजों और युद्धपोतों की गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर रख सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक पनडुब्बियों को रडार और सामान्य निगरानी प्रणालियों से बचाने में मदद करती है।

दुश्मन जहाजों को ट्रैक करने में माहिर

ईरानी नेवी का दावा है कि इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता है। ये दुश्मन के जहाजों, युद्धपोतों और समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रख सकती हैं।

जरूरत पड़ने पर ये पनडुब्बियां हमले करने में भी सक्षम बताई जा रही हैं। ईरान का कहना है कि दुश्मन जहाजों को ट्रैक करना और उन्हें बेअसर करना इन पनडुब्बियों की प्रमुख रणनीतिक क्षमता का हिस्सा है।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी और तेजी से संचालित होने वाली पनडुब्बियां संकरे समुद्री क्षेत्रों में बेहद प्रभावी साबित होती हैं, क्योंकि इन्हें पकड़ना और ट्रैक करना अपेक्षाकृत मुश्किल होता है।

समुद्री टकराव और बढ़ने की आशंका

होर्मुज स्ट्रेट में पहले से ही भारी सैन्य गतिविधियां चल रही हैं। अमेरिकी और ईरानी नौसेनाएं लगातार निगरानी, शक्ति प्रदर्शन और रणनीतिक गतिविधियों में लगी हुई हैं। ऐसे में ईरान द्वारा पनडुब्बियों की तैनाती को सामरिक चेतावनी और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो समुद्री टकराव की संभावना बढ़ सकती है। इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी दिखाई दे सकता है।

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