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सुशासन तिहार के बीच छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक बदलाव : 42 IAS अधिकारियों का तबादला, 8 जिलों के कलेक्टर बदले, शासन व्यवस्था को नई रफ्तार देने की तैयारी
छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 42 IAS अधिकारियों का तबादला किया है। इस बदलाव में 8 जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं। IAS विश्वदीप को बीजापुर का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वहीं 1994 बैच की IAS ऋचा शर्मा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अपर मुख्य सचिव बनाते हुए अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
बड़ी सौगात : छुईखदान उपकोषालय यथावत रखने की घोषणा, वनांचल क्षेत्र में विकास कार्यों को मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छुईखदान के सरोधी (बकरकट्टा) में जन चौपाल के दौरान ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और कई विकास कार्यों की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि छुईखदान का उपकोषालय (ट्रेजरी) यथावत रहेगा। चौपाल में सड़क, पुल, स्कूल भवन, पंचायत भवन, बिजली सब स्टेशन और एम्बुलेंस जैसी कई योजनाओं को मंजूरी दी गई। यह दौरा सरकार की जन-केंद्रित शासन व्यवस्था और मौके पर निर्णय लेने की नीति का उदाहरण माना गया, जिससे स्थानीय लोगों में सकारात्मक माहौल बना।
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डिजिटल जालसाजी : मंत्रालय के फर्जी नियुक्ति पत्र से 1.5 करोड़ की ठगी, गुरुजी ही निकले मास्टरमाइंड
रायपुर (राखी थाना क्षेत्र) में एक बड़े फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें दो लोगों ने छत्तीसगढ़ सरकार के नाम से फर्जी भर्ती आदेश बनाकर व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर फैलाए। इन फर्जी दस्तावेजों में मंत्रालय और अधिकारियों के नकली डिजिटल साइन भी थे। नौकरी दिलाने के नाम पर उन्होंने करीब 34 बेरोजगार युवाओं से लगभग 1.5 करोड़ रुपये ठग लिए। पुलिस जांच में मुख्य आरोपी एक शिक्षक और उसका साथी क्लर्क निकले, जिन्हें साइबर सेल की मदद से गिरफ्तार कर लिया गया है। कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
श्रमिकों के लिए खुला खजाना : बजट में 256 करोड़ का प्रावधान, आवास और ई-रिक्शा सहायता राशि में भारी बढ़ोतरी
छत्तीसगढ़ सरकार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में, श्रमिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है। पिछले 2 साल 4 माह में लगभग 800 करोड़ रुपये DBT के माध्यम से श्रमिकों के खातों में भेजे गए हैं। श्रमिक बच्चों की शिक्षा के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को अच्छे निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। सरकार कई अन्य योजनाएं जैसे छात्रवृत्ति, औजार किट, मेधावी प्रोत्साहन और श्रम अन्न योजना भी चला रही है।
बड़ी राहत : संपत्ति रजिस्ट्री पर 0.60% उपकर खत्म, पंजीयन सस्ता हुआ
छत्तीसगढ़ सरकार ने अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60% अतिरिक्त उपकर समाप्त कर दिया है, जिससे अब जमीन और मकान की रजिस्ट्री सस्ती हो जाएगी। यह फैसला छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत तत्काल प्रभाव से लागू हुआ है। सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों, किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा, जैसे 1 करोड़ रुपये की संपत्ति पर लगभग 60,000 रुपये की बचत।
छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र, पेंशन, वृद्धाश्रम और तीर्थ यात्रा योजनाओं से मिल रहा सम्मानजनक जीवन
छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में वरिष्ठ नागरिकों के लिए समग्र सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर रही है। राज्य में वृद्धाश्रम, पैलिएटिव केयर, वृद्धावस्था पेंशन, सहायक उपकरण और तीर्थ यात्रा जैसी योजनाओं के माध्यम से बुजुर्गों को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी सहायता दी जा रही है। प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए आधार आधारित सीधे लाभ सुनिश्चित किए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है।
महतारी वंदन योजना : छत्तीसगढ़ की महिलाओं को 27वीं किस्त का इंतजार, जानें कब आएगा पैसा और कैसे देखें स्टेटस
छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को हर महीने ₹1,000 की आर्थिक सहायता DBT के जरिए दी जाती है। अब तक 26 किस्तें जारी हो चुकी हैं और लगभग 68 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। 27वीं किस्त की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन पिछले पैटर्न के अनुसार इसके मई 2026 के पहले सप्ताह (1–10 मई के बीच) जारी होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापानी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात, निवेश और तकनीकी सहयोग पर जोर
विष्णु देव साय ने रायपुर में जापानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास और तकनीकी सहयोग पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति की सराहना करते हुए निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई, जिससे रोजगार और विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
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परीक्षाओं में सख्ती : छत्तीसगढ़ का नया कानून नकल और पेपर लीक पर लगाएगा लगाम
छत्तीसगढ़ सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए “लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक-2026” लागू किया है। यह कानून CGPSC सहित सभी सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों की परीक्षाओं पर लागू होगा। इसके तहत पेपर लीक, नकल, फर्जी उम्मीदवार और डिजिटल माध्यम से धोखाधड़ी जैसे कार्यों को गंभीर अपराध माना गया है। दोषियों पर 3 से 10 साल तक की सजा, 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना और संपत्ति जब्ती का प्रावधान है। अभ्यर्थियों के लिए भी सख्त नियम हैं—नकल पकड़े जाने पर परीक्षा रद्द हो सकती है और 1 से 3 साल तक परीक्षा देने पर प्रतिबंध लग सकता है।
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24 घंटे में पलटा आदेश : कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक वापस
छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने वाला आदेश 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। आदेश में राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी, लेकिन विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा। कांग्रेस ने फैसले के समय और मंशा पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है। सरकार का कहना है कि यह पहले से लागू नियमों की पुनरावृत्ति थी, जबकि विपक्ष इसे स्पष्टता की कमी और राजनीतिक कदम बता रहा है।
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छुट्टियों पर सख्ती: बिना अनुमति अवकाश पर रोक, प्रशासनिक कामकाज के लिए नए निर्देश
छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए अगले तीन महीनों तक सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर सख्त नियम लागू किए हैं। अब कोई भी कर्मचारी बिना अनुमति अवकाश नहीं ले सकेगा, और आपात स्थिति में भी पहले सूचना देना अनिवार्य होगा। लंबी छुट्टी से पहले कार्यों का प्रभार सौंपना जरूरी कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य सुशासन तिहार और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किसी तरह की बाधा न आने देना है।
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माओवादी संगठनों पर सख्ती : CPI (माओवादी) सहित 6 फ्रंटल संगठनों पर प्रतिबंध एक साल और बढ़ा
छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाते हुए CPI (माओवादी) और उससे जुड़े छह फ्रंटल संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंध को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है, जो 12 अप्रैल 2026 से लागू होगा। सरकार का कहना है कि ये संगठन कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं तथा शहरी क्षेत्रों तक अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें आदिवासी, महिला और किसान संगठनों सहित “जनताना सरकार” जैसे ढांचे भी शामिल हैं, जिन्हें समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था माना जाता है।