"बकरी पालन" के लिए 17 परिणाम मिले
आजीविका मॉडल : सेरीखेड़ी पहुंचे केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान, महिला समूहों के नवाचार की सराहना
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने रायपुर के सेरीखेड़ी स्थित मल्टी यूटिलिटी सेंटर का दौरा कर अजा परियोजना, पिंक दीदी ई-ऑटो सेवा और महिला स्व-सहायता समूहों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण आजीविका मॉडल को देशभर के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
पशुपालन क्रांति की शुरुआत : धमतरी के भटगांव में स्थापित होगा अत्याधुनिक ब्रीडिंग एवं रिसर्च सेंटर
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भटगांव में राज्य का पहला “रिसर्च कम इंटीग्रेटेड प्रोडक्शन एडवांसमेंट ब्रीडिंग सेंटर” स्थापित किया जा रहा है। कलेक्टर की पहल पर शुरू यह परियोजना पशुपालन को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक और आधुनिक व्यवसाय में बदलने का लक्ष्य रखती है। इस केंद्र में कृत्रिम गर्भाधान, पैथोलॉजी जांच, रोग निदान और उन्नत प्रयोगशाला जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे पशुओं की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
छत्तीसगढ़
भुरकोनी के मत्स्य कृषक अब्दुल जमील ने 30 एकड़ के आधुनिक फिश फार्म से रची सफलता की नई मिसाल
अब्दुल जमील, ग्राम भुरकोनी (बागबाहरा), ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत प्रशिक्षण लेकर मछली पालन को आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया। वर्ष 2000 में छोटे स्तर से शुरुआत करने वाले जमील आज लगभग 30 एकड़ में फैले फिश फार्म का संचालन करते हैं, जहाँ वे रोहू, कतला, मृगाल, पंगास और तिलापिया जैसी मछलियों के साथ-साथ बीज उत्पादन भी करते हैं।
महासमुंद
मेरा गांव : प्रकृति, परंपरा और परिवर्तन के बीच संतुलन साधता जीवंत गांव कौंदकेरा
कौंदकेरा एक ऐसा गांव है, जहां प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। यह गांव जहां अपनी परंपराओं से शक्ति प्राप्त करता है, वहीं आधुनिक चुनौतियों से जूझ भी रहा है। आवश्यकता है संतुलित विकास और सामाजिक जागरूकता की, ताकि यह गांव अपनी पहचान को बनाए रखते हुए भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा सके।
छत्तीसगढ़
दीदी के बखरी से बदली तस्वीर : कांकेर की 3,364 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, 25 हजार तक पहुंच रही मासिक आय
कांकेर जिला में “दीदी के बखरी” पहल के तहत महिलाएं सब्जी बाड़ी, मुर्गी पालन, मछली पालन और वनोपज संग्रहण से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। बिहान योजना के अंतर्गत 3364 महिलाएं इस मॉडल से जुड़ी हैं और हर महीने 20-25 हजार रुपए तक कमा रही हैं। आने वाले समय में 10,780 महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिल रही है।