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चार किमी वापस लिया ट्रेन
चार किमी वापस लिया ट्रेन
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टला रेल हादसा : धधकती आग के बीच लोको पायलट ने रिवर्स गियर में दौड़ाई ट्रेन, बचाई सैकड़ों जानें

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में मक्सी-रुठियाई रेलखंड पर एक ट्रेन उस समय बड़े हादसे से बाल-बाल बच गई जब पास के खेतों में जलाई गई पराली की आग तेज हवा से फैलकर रेलवे ट्रैक तक पहुंच गई। सामने आग देखकर लोको पायलट ने तुरंत फैसला लेते हुए ट्रेन को करीब 4 किलोमीटर पीछे की ओर चलाया, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान बच गई। इस दौरान दूसरी ट्रेन को भी समय रहते रोक दिया गया ताकि टक्कर का खतरा न रहे। बाद में दमकल विभाग ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और रेल यातायात बहाल हुआ। घटना ने पराली जलाने की लापरवाही और लोको पायलट की त्वरित सूझबूझ दोनों को चर्चा में ला दिया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 29 Apr 2026, 11:23 AM · अपडेट: 02 May 2026, 09:27 AM
मध्य प्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार को एक ऐसा वाकया हुआ जिसने रोंगटे खड़े कर दिए। मक्सी-रुठियाई रेल खंड पर सफर कर रहे सैकड़ों यात्रियों की जान उस वक्त हलक में अटक गई, जब उनकी ट्रेन अचानक आग की लपटों से घिर गई। लेकिन लोको पायलट की सूझबूझ और तत्परता ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। उन्होंने फिल्मी अंदाज में ट्रेन को करीब 4 किलोमीटर तक पीछे की दिशा में दौड़ाया और यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।

खेतों से उठी लपटों ने ट्रैक को घेरा

घटना दोपहर लगभग 12:45 बजे की है। बीना-नागदा पैसेंजर ट्रेन अपनी सामान्य गति से ब्यावरा-राजगढ़ और पचोर स्टेशनों के बीच गुजर रही थी। इसी दौरान, रेलवे ट्रैक के किनारे स्थित खेतों में अवैध रूप से जलाई गई पराली की आग ने विकराल रूप ले लिया। तेज हवाओं के झोंकों ने आग की लपटों को रेलवे लाइन की ओर धकेल दिया। देखते ही देखते आसमान काले धुएं से भर गया और सामने की पटरी पूरी तरह आग की चपेट में आ गई।

मौत को सामने देख पायलट का साहसिक फैसला

ट्रेन के लोको पायलट ने जब देखा कि पटरी पर आगे बढ़ना मतलब सीधे मौत के मुंह में जाना है, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए एक ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने ट्रेन में 'रिवर्स गियर' डाला और गाड़ी को पीछे की ओर चलाना शुरू कर दिया।

"मंजर ऐसा था कि अगर ट्रेन थोड़ी भी आगे बढ़ती, तो वह आग के गोले में तब्दील हो सकती थी।"

लोको पायलट ने पूरी सावधानी बरतते हुए ट्रेन को करीब 4 किलोमीटर तक उल्टी दिशा में दौड़ाया। इसी बीच, पीछे से आ रही साबरमती एक्सप्रेस (गुना-अहमदाबाद) को भी तुरंत सूचना देकर ब्यावरा स्टेशन पर रोक दिया गया, ताकि पीछे से टक्कर का कोई खतरा न रहे।

चिलचिलाती धूप और आग की तपन

आग इतनी भीषण थी कि ब्यावरा, पचोर, नरसिंहगढ़ और खिलचीपुर से दमकल की गाड़ियां बुलानी पड़ीं। दोपहर 4 बजे तक पूरा रेल यातायात ठप रहा। यात्रियों के लिए यह समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। एक ओर बाहर धधकती आग और दूसरी ओर ऊपर से बरसती चिलचिलाती धूप; ट्रेन के लोहे के डिब्बे भट्टी की तरह तपने लगे थे। करीब 3 घंटे तक यात्री ट्रेन के अंदर पसीने से तरबतर रहे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि वे सुरक्षित हैं, तो सभी ने राहत की सांस ली।

लापरवाही और कार्रवाई

इस घटना ने एक बार फिर खेतों में पराली जलाने की खतरनाक प्रथा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दमकलकर्मियों की घंटों की मशक्कत के बाद जब आग पर काबू पाया गया, तब जाकर रेल यातायात बहाल हो सका। रेलवे प्रशासन अब इस मामले की जांच कर रहा है कि आग किस खेत से शुरू हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

अधिकारियों ने लोको पायलट की प्रशंसा की है, जिनकी त्वरित प्रतिक्रिया ने सैकड़ों परिवारों को उजड़ने से बचा लिया। आज राजगढ़ के लोग उस पायलट को किसी हीरो से कम नहीं मान रहे हैं।

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