केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए और संसद परिसर में कांग्रेस नेता जयराम रमेश के साथ हुई बातचीत के दौरान अपनी राजनीतिक शैली पर खुलकर बोले। उन्होंने कहा, मैं स्ट्रीट फाइटर हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं। उनका यह बयान इस्तीफे के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया माना जा रहा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
संसद के गलियारे में हुई दिलचस्प बातचीत
सोमवार को संसद भवन पहुंचने पर धर्मेंद्र प्रधान की मुलाकात कांग्रेस सांसद जयराम रमेश से हुई। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पुराने राजनीतिक दिनों को याद किया। धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि एक समय जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासन की सराहना की थी। उसी दौरान वे उनसे मिलने एआईसीसी कार्यालय भी पहुंचे थे। बाद में जब जयराम रमेश केंद्रीय वाणिज्य मंत्री बने और धर्मेंद्र प्रधान सांसद थे, तब उन्होंने अपने क्षेत्र के मिर्च उत्पादकों से जुड़े मुद्दे को लेकर उनसे मुलाकात की थी। इसी चर्चा के बीच जयराम रमेश ने मुस्कुराते हुए कहा, It happens. इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब दिया, Nothing happens. I am a street fighter, not an AC room activist. उनका यह जवाब अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पेपर लीक रोकने के लिए सरकार लाई नया संशोधन
इधर, केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल पर सख्ती बढ़ाने के उद्देश्य से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में यह विधेयक प्रस्तुत किया। नए संशोधन में व्यक्तिगत अपराधियों और संगठित गिरोहों के लिए अलग-अलग दंड का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि अब केवल पेपर लीक कराने वाले गिरोह ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी निजी एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एजेंसियों पर बढ़ी जवाबदेही
यदि बायोमैट्रिक सत्यापन, प्रश्नपत्र परिवहन या परीक्षा संचालन से जुड़ी किसी सेवा प्रदाता कंपनी के निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधक या अन्य जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर कार्रवाई होगी। पहले ऐसे मामलों में अधिकतम 5 वर्ष की सजा और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना था, जिसे बढ़ाकर अब 10 वर्ष तक की सजा और 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना करने का प्रस्ताव रखा गया है।
संसद पहुंचने पर एनडीए सांसदों ने किया स्वागत
शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद जब धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे तो एनडीए के कई सांसदों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान वे मुस्कुराते नजर आए। मौके पर मौजूद एक सांसद ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी केंद्रीय मंत्री ने बिना किसी व्यक्तिगत आरोप के इस्तीफा दिया है। इस टिप्पणी के बाद भी संसद परिसर में काफी देर तक इस घटनाक्रम की चर्चा होती रही।