हाइपोथायरॉइडिज्म के मरीजों को शरीर में हार्मोन की कमी पूरी करने के लिए आमतौर पर लेवोथायरोक्सिन दवा दी जाती है। इसे सुबह खाली पेट सादे पानी के साथ और रोजाना एक निश्चित समय पर लेने की सलाह दी जाती है। नियमित समय पर दवा लेने से शरीर में हार्मोन का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इसे चाय, कॉफी, दूध या किसी अन्य पेय के साथ लेने के बजाय सामान्य पानी के साथ लेना बेहतर माना जाता है।
नाश्ते से पहले रखें पर्याप्त अंतर
कई लोग थायरॉइड की गोली लेने के तुरंत बाद नाश्ता कर लेते हैं, जिससे दवा का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। सामान्य तौर पर दवा लेने और नाश्ता करने के बीच कम से कम 30 से 60 मिनट का अंतर रखने की सलाह दी जाती है। भोजन के साथ दवा लेने पर यह शरीर में पूरी तरह अवशोषित नहीं हो पाती और इसका अपेक्षित प्रभाव कम हो सकता है। इसलिए सुबह की दिनचर्या तय करते समय इस अंतर का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
ब्रेड और हाई फाइबर भोजन में सावधानी
थायरॉइड के मरीजों के लिए ब्रेड खाना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन दवा लेने के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचना चाहिए। खासकर हाई फाइबर ब्रेड और अधिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ दवा के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं। मरीज निर्धारित समय का अंतर रखने के बाद ब्रेड या अन्य नाश्ता कर सकते हैं। खाने की किसी चीज को पूरी तरह बंद करने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।कैल्शियम लेवोथायरोक्सिन के साथ प्रतिक्रिया
शरीर में उसके अवशोषण को कम कर सकता है। ब्रेड के साथ चीज, दूध या कैल्शियमयुक्त स्प्रेड लेने वाले लोगों को भी समय का ध्यान रखना चाहिए। इसी तरह चाय, कॉफी और सोया उत्पादों का सेवन करने से पहले भी डॉक्टर द्वारा बताया गया अंतर रखना जरूरी है। सप्लीमेंट और दवा के बीच रखें चार घंटे कैल्शियम और आयरन सप्लीमेंट को थायरॉइड की दवा के साथ नहीं लेना चाहिए। सामान्य तौर पर लेवोथायरोक्सिन और इन सप्लीमेंट के बीच कम से कम चार घंटे का अंतर रखने की सलाह दी जाती है। एंटासिड, एसिडिटी की दवाएं और कुछ अन्य औषधियां भी इसके असर को प्रभावित कर सकती हैं। अगर मरीज किसी दूसरी बीमारी की दवा, विटामिन या सप्लीमेंट ले रहा है तो इसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर देनी चाहिए।
परेशानी बनी रहे तो डॉक्टर से लें सलाह
सही समय और तरीके से दवा लेने के बावजूद थकान, वजन बढ़ना, कब्ज, कमजोरी या ठंड अधिक लगने जैसी समस्याएं बनी रहें तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मरीज को अपनी मर्जी से दवा की मात्रा कम या ज्यादा नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर टीएसएच और अन्य जरूरी जांचों की रिपोर्ट के आधार पर दवा की खुराक में बदलाव कर सकते हैं। नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह से थायरॉइड हार्मोन के स्तर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है।