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बड़े पैमाने पर नकल
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जांजगीर-चांपा

प्रश्नपत्र वायरल : एआई से नकल का बड़ा खुलासा, डी-फार्मेसी परीक्षा में 500 से ज्यादा छात्र घेरे में

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) से संबद्ध चार कॉलेजों में डी. फार्मेसी परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर नकल का मामला सामने आया है। जांच में 500 से अधिक छात्रों की संलिप्तता सामने आई। आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र और उत्तर व्हाट्सएप पर वायरल हो गए थे। कई छात्र मोबाइल और एआई ऐप्स की मदद से उत्तर लिखते पाए गए। जांच के दौरान कुछ कॉलेजों में नकल सामग्री बरामद हुई, जबकि एक शिक्षक के मोबाइल में उत्तरों की सॉफ्ट कॉपी भी मिली। कुछ कॉलेज प्रशासन पर जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप लगे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 10 May 2026, 11:06 AM · अपडेट: 03 Oct 2026, 07:23 AM
जांजगीर-चांपा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ में तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) से संबद्ध जांजगीर-चांपा जिले के चार निजी महाविद्यालयों में डी. फार्मेसी द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर नकल किए जाने का खुलासा हुआ है। जांच में यह पाया गया कि परीक्षा में 500 से अधिक छात्र संदिग्ध रूप से शामिल थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि नकल के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा था।

सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय ने बनाई जांच टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। कुलपति डॉ. अरुण अरोड़ा को मिली गोपनीय सूचना के बाद चार अलग-अलग जांच दल गठित किए गए और उन्हें जांजगीर-चांपा भेजा गया। उड़नदस्ते ने जब परीक्षा केंद्रों पर अचानक निरीक्षण किया, तो वहां की स्थिति देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच के दौरान पता चला कि परीक्षा शुरू होने से लगभग आधा घंटा पहले ही प्रश्न पत्र और उनके हल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर वायरल हो चुके थे।

मोबाइल और एआई ऐप्स से लिखे जा रहे थे उत्तर

जांच टीम को कई परीक्षा केंद्रों में परीक्षार्थियों के पास मोबाइल फोन मिले। बताया जा रहा है कि छात्र एआई आधारित ऐप्स की सहायता से सवालों के उत्तर तैयार कर रहे थे। कई उत्तर पुस्तिकाओं में लंबे और एक जैसे उत्तर लिखे पाए गए, जिससे स्पष्ट हुआ कि उत्तर किसी डिजिटल माध्यम से तैयार किए गए थे। बहुविकल्पीय प्रश्नों के जवाब भी बड़ी संख्या में एक समान मिले। अधिकारियों का मानना है कि परीक्षा के दौरान संगठित तरीके से तकनीक का दुरुपयोग किया गया।

कॉलेज प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में

जांच के दौरान कुछ कॉलेजों का रवैया भी संदिग्ध पाया गया। केसरी कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्रबंधन ने जांच दल को सीसीटीवी फुटेज का डीवीआर देने से इनकार कर दिया। वहीं ज्ञान रोशनी फार्मेसी कॉलेज में पर्यवेक्षक की टेबल से करीब 20 पन्नों की नकल सामग्री बरामद की गई। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि इस पूरे मामले में अंदरूनी मिलीभगत भी हो सकती है।

पर्याप्त स्टाफ नहीं, शिक्षक के फोन में मिले उत्तर

संस्कृति इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पामगढ़ में परीक्षा संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ तक मौजूद नहीं था। जांच अधिकारियों को उस समय और बड़ा झटका लगा, जब वहां ड्यूटी पर मौजूद शिक्षक कमल कुमार के मोबाइल फोन में परीक्षा के उत्तरों की सॉफ्ट कॉपी मिली। इससे यह मामला और गंभीर हो गया।

दूसरे कॉलेज से भी जुड़े मिले तार

जांच में यह भी सामने आया कि इस नकल गिरोह के संबंध गौरेला-पेंड्रा-मरवाही स्थित आयुष कॉलेज ऑफ फार्मेसी से भी जुड़े हो सकते हैं। वहां से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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