लोक कलाकार संरक्षण समिति बागबाहरा के तत्वावधान में आयोजित सप्त दिवसीय आवासीय लोक संगीत प्रशिक्षण कार्यशाला का रंगारंग और भव्य समापन समारोह स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बागबाहरा के विशाल प्रांगण में उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। सात दिनों तक चले इस प्रदेश स्तरीय आयोजन में छत्तीसगढ़ के 13 जिलों से पहुँचे 387 छात्र-छात्राओं ने गायन, वादन, लोक नृत्य एवं मानस व्याख्यान जैसी विविध विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान प्रतिभागियों ने लोक कला की बारीकियों को सीखते हुए अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
मुख्य अतिथि नरेश जैन ने की आयोजन की सराहना
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राइस मिल एसोसिएशन जिला महासमुंद के अध्यक्ष नरेश जैन ने आयोजन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बागबाहरा जैसे छोटे नगर में बिना किसी शासकीय अनुदान के इतने बड़े और सुव्यवस्थित सांस्कृतिक आयोजन का सफल संचालन वास्तव में प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदेश की असली पहचान उसकी लोक संस्कृति से होती है और लोक कलाकार संरक्षण समिति इस संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।लोक कला का महाकुंभ
विशेष अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार मुन्नालाल देवदास ने अपने संबोधन में बागबाहरा अंचल के सुप्रसिद्ध रचनाकार स्वर्गीय मेहत्तर राम साहू को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि निष्ठा, समर्पण और निरंतरता से किया गया कार्य हमेशा सफलता दिलाता है। उन्होंने लोक कलाकार संरक्षण समिति को प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना का वाहक बताते हुए कहा कि बिना सरकारी सहायता के इतने वर्षों से इस स्तर का आयोजन करना अपने आप में मिसाल है। उन्होंने इस आयोजन को “लोक कला क्षेत्र का महाकुंभ” बताते हुए कहा कि पिछले पाँच वर्षों में एक हजार से अधिक प्रशिक्षार्थियों को तैयार करना ऐतिहासिक उपलब्धि है।
प्लेबैक सिंगर सुनील सोनी ने युवाओं को किया प्रेरित
समारोह की सबसे आकर्षक कड़ी रही छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर सुनील सोनी की गरिमामयी उपस्थिति। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों को प्रेरक भेंट प्रदान करते हुए अपने संघर्ष, साधना और संगीत यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि निरंतर अभ्यास, त्याग और समर्पण ही किसी कलाकार को ऊँचाइयों तक पहुँचाता है तथा सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने समिति द्वारा जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसे पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय बताया।कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में प्रशिक्षार्थियों द्वारा प्रस्तुत सामूहिक लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया।नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का उद्देश्य
आयोजन समिति ने बताया कि इस सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य केवल कलाकार तैयार करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के भीतर अपनी लोक जड़ों, मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति आत्मीयता और जिम्मेदारी का भाव विकसित करना है। समिति ने अगले वर्ष इस कार्यशाला को और अधिक विस्तारित, आधुनिक और भव्य स्वरूप में आयोजित करने का संकल्प भी दोहराया।
