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लगातार ब्लोटिंग और पेट दर्द को सामान्य गैस समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
लगातार ब्लोटिंग और पेट दर्द को सामान्य गैस समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
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साइलेंट किलर : ओवेरियन कैंसर का संकेत, इन लक्षणों को न करें नजर अंदाज 

महिलाओं में लगातार पेट फूलना, जल्दी पेट भर जाना और पेल्विक दर्द जैसी समस्याएं कभी-कभी ओवेरियन कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते लक्षणों की पहचान और जांच से गंभीर जोखिम को कम किया जा सकता है।

कीर्तिमान नेटवर्क
21 May 2026, 01:16 PM
नई दिल्ली

भारत में महिलाओं के बीच तेजी से बढ़ रहे ओवेरियन कैंसर को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य गैस, अपच या हार्मोनल बदलाव जैसे दिखाई देते हैं। यही वजह है कि कई मामलों में बीमारी का पता काफी देर से चलता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शरीर में कुछ बदलाव लगातार महसूस हो रहे हैं, तो उन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

पेट फूलना हो सकता है गंभीर संकेत

महिलाओं में लगातार ब्लोटिंग यानी पेट फूलना ओवेरियन कैंसर के सबसे आम संकेतों में शामिल है। सामान्य ब्लोटिंग कुछ समय बाद ठीक हो जाती है, लेकिन अगर यह कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है। कई बार कैंसर के कारण पेट में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे पेट भारी और सूजा हुआ महसूस हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि समस्या तब ज्यादा गंभीर मानी जाती है जब ब्लोटिंग के साथ पेट दर्द, भूख कम लगना या वजन में बदलाव भी दिखाई देने लगे 

जल्दी पेट भर जाना,हो सकता है चेतावनी 

यदि किसी महिला को कम खाना खाने के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस हो रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ओवेरियन कैंसर के मामलों में कई महिलाओं ने शुरुआती चरण में इसी तरह के लक्षण महसूस किए। इसके अलावा लगातार थकान, कमर दर्द और बार-बार पेशाब आना भी बीमारी की ओर संकेत कर सकते हैं।  कई बार महिलाएं इन लक्षणों को तनाव, खराब लाइफस्टाइल या पीरियड्स से जुड़ी परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही लापरवाही बीमारी को गंभीर चरण तक पहुंचा सकती है।

महिलाओं को अधिक खतरा

स्वास्थ्य रिपोर्ट्स के अनुसार 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का खतरा अधिक देखा जाता है। इसके अलावा जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर या ओवेरियन कैंसर का इतिहास रहा हो, उनमें जोखिम बढ़ सकता है। BRCA1 और BRCA2 जैसे जेनेटिक बदलाव भी इस बीमारी की संभावना को बढ़ाते हैं।  हर ब्लोटिंग कैंसर का संकेत नहीं होती। गैस, कब्ज, हार्मोनल बदलाव और पाचन संबंधी समस्याओं के कारण भी पेट फूल सकता है। लेकिन यदि लक्षण लगातार बने रहें और शरीर में “नई तरह की परेशानी” महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

बढ़ सकती है इलाज की सफलता

ओवेरियन कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती इसका देर से पता चलना है। डॉक्टरों के अनुसार यदि बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए, तो इलाज ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इसलिए महिलाओं को शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित हेल्थ चेकअप और गायनेकोलॉजिकल जांच को भी बेहद जरूरी मानते हैं। खासकर उन महिलाओं के लिए जो हाई रिस्क कैटेगरी में आती हैं।

किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

  1. लगातार पेट फूलना
  2. जल्दी पेट भर जाना
  3. बार-बार पेशाब आना
  4. पेट या पेल्विक हिस्से में दर्द
  5. लगातार थकान
  6. अचानक वजन कम होना
  7. पीरियड्स में असामान्य बदलाव

यदि ये लक्षण लगातार कई हफ्तों तक बने रहें, तो विशेषज्ञ जांच कराने की सलाह देते हैं।

भारत में ओवेरियन कैंसर 

भारत में ओवेरियन कैंसर अभी भी अपेक्षाकृत कम प्रतिशत महिलाओं में पाया जाता है, लेकिन इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों और कैंसर रजिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार

  • भारत में हर साल लगभग 47 हजार से अधिक नए ओवेरियन कैंसर के मामले सामने आते हैं।
  • भारतीय महिलाओं में इसकी औसत दर करीब 5 से 7 मामले प्रति 1 लाख महिलाओं पर मानी जाती है।
  • महिला कैंसर मामलों में ओवेरियन कैंसर की हिस्सेदारी लगभग 6% के आसपास बताई जाती है।
  • यह भारत में महिलाओं में होने वाले कैंसरों में तीसरा सबसे आम स्त्री रोग संबंधी कैंसर माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी चिंता यह है कि करीब 70% से अधिक मामलों का पता एडवांस स्टेज में चलता है, क्योंकि शुरुआती लक्षण सामान्य गैस, ब्लोटिंग या कमजोरी जैसे लगते हैं। हालांकि यह बीमारी हर महिला को नहीं होती, लेकिन 40-60 वर्ष की उम्र, पारिवारिक कैंसर इतिहास, हार्मोनल बदलाव और जेनेटिक कारणों वाली महिलाओं में खतरा अधिक माना जाता है।

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