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हापौर पर आरोप
हापौर पर आरोप
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हाई-वोल्टेज ड्रामा : महापौर के केबिन में अधिकारियों को बंधक बनाने का आरोप, भारी पुलिस बल ने कराया मुक्त

दुर्ग नगर निगम में महापौर अलका चंद्राकर बाघमार पर तीन वरिष्ठ अधिकारियों को अपने केबिन में बंधक बनाने का आरोप लगने से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद उरला हाईस्कूल में भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों की कार्यशैली पर महापौर की सार्वजनिक नाराजगी के बाद शुरू हुआ। अगले दिन महापौर ने आरईएस और मंडी बोर्ड के अधिकारियों को जवाब-तलब के लिए बुलाया, जहां कथित रूप से उन्हें बाहर जाने से रोका गया।

प्रकाशित: 16 May 2026, 05:23 PM · अपडेट: 16 Sep 2026, 02:35 PM
दुर्ग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के दुर्ग नगर निगम में इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर है। विकास कार्यों के भूमिपूजन से शुरू हुआ एक विवाद इतना बढ़ गया कि नगर निगम दफ्तर भारी पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। दुर्ग की महापौर अलका चंद्राकर (बाघमार) पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपनी नाराजगी के चलते तीन सीनियर सरकारी अधिकारियों को अपने केबिन में बंधक बना लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी और सीएसपी समेत दो थानों की पुलिस को मौके पर मोर्चा संभालना पड़ा, तब कहीं जाकर अधिकारियों को बाहर निकाला जा सका।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शहर की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष ने इसे 'अधिकारियों पर मानसिक दबाव' बनाने की राजनीति करार दिया है।

शिक्षा मंत्री के सामने बरसीं महापौर

इस पूरे विवाद की स्क्रिप्ट 14 मई 2026 को उरला हाईस्कूल में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान लिखी गई थी। स्कूल में अतिरिक्त कक्ष और हॉल के निर्माण के लिए भूमिपूजन का कार्यक्रम था। मंच पर सूबे के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और महापौर अलका बाघमार समेत कई दिग्गज मौजूद थे।

इसी दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली से नाराज महापौर का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मंच से ही माइक संभालकर अधिकारियों की क्लास लगा दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में महापौर साफ तौर पर कहती दिख रही हैं:

"अधिकारी समय पर जनप्रतिनिधियों को जानकारी नहीं देते। वे सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। अगर अधिकारी ढंग से काम नहीं कर सकते, तो उन्हें ऐसे कार्यक्रमों में आने की कोई जरूरत नहीं है।"

असंतोषजनक जवाब और 'तालाबंदी'

मंच पर शुरू हुई यह तल्खी अगले ही दिन यानी 15 मई को चरम पर पहुंच गई। महापौर अलका बाघमार ने उरला स्कूल के कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था और गड़बड़ियों को लेकर जवाब-तलब करने के लिए तीन बड़े अधिकारियों को नगर निगम स्थित अपने केबिन में तलब किया। इन अधिकारियों में शामिल थे:

  • जे.के. मेश्राम (कार्यपालन अभियंता, आरईएस विभाग)

  • सी.के. सोने (एसडीओ, आरईएस विभाग)

  • प्रवीण पांडे (एसडीओ, मंडी बोर्ड)

सूत्रों के मुताबिक, केबिन के भीतर महापौर ने अधिकारियों से विकास कार्यों में लापरवाही को लेकर तीखे सवाल किए। जब अधिकारियों की तरफ से मिले जवाब से महापौर संतुष्ट नहीं हुईं, तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसके बाद अधिकारियों को केबिन से बाहर जाने से रोक दिया गया और अंदर ही 'बंधक' बना लिया गया।

नगर निगम बना छावनी

केबिन के भीतर खुद को फंसा देख एक घबराए हुए अधिकारी ने चुपके से पुलिस को इस बात की सूचना दे दी। नगर निगम में अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तुरंत एक्शन लेते हुए एडिशनल एसपी (ASP), सीएसपी (CSP) और दो थानों की पुलिस टीम भारी बल के साथ नगर निगम दफ्तर पहुंच गई। पुलिस ने सूझबूझ से स्थिति को संभाला, महापौर के केबिन में प्रवेश किया और घंटों से फंसे तीनों अधिकारियों को सकुशल बाहर निकाला।

पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल ने साधा निशाना

इस घटना के बाद कांग्रेस और विपक्ष हमलावर हो गया है। दुर्ग के पूर्व महापौर और कांग्रेस नेता धीरज बाकलीवाल ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है।

धीरज बाकलीवाल ने कहा: "लोकतंत्र में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को उसकी इच्छा के विरुद्ध इस तरह बंधक बनाना कानूनी और नैतिक रूप से बिल्कुल गलत है। अपनी राजनीति चमकाने और अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए अधिकारियों पर इस तरह का दबाव बनाना प्रशासनिक व्यवस्था को ठप करने जैसा है।"

"बंधक नहीं बनाया, सिर्फ जवाब मांगा था"

चौतरफा घिरने के बाद महापौर अलका बाघमार ने मीडिया के सामने आकर अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने बंधक बनाए जाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

महापौर का पक्ष:

  • कोई बंधक नहीं: किसी भी अधिकारी को बंधक या जबरन बंद नहीं किया गया था, वे केवल शहर के विकास कार्यों की समीक्षा कर रही थीं।

  • तालमेल की कमी: आरईएस, मंडी बोर्ड और निगम जैसे विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल (Coordination) की भारी कमी है, जिसके कारण शहर के जनहित और विकास के कार्य बीच में लटके हुए हैं।

  • जनता के प्रति जवाबदेही: जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता के प्रति उनकी जवाबदेही है, इसलिए अधिकारियों से सुस्त कार्यप्रणाली पर जवाब मांगा जा रहा था।

पहले भी विवादों से रहा है नाता

यह पहली बार नहीं है जब महापौर अलका बाघमार अपनी आक्रामक कार्यशैली को लेकर चर्चा में आई हैं। अभी कुछ ही दिन पहले भी उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। उस वीडियो में वह सड़क किनारे ठेला लगाने वाले गरीब दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों पर बुरी तरह बिफरती और सख्त नाराजगी जताती नजर आई थीं।

ताजा 'बंधक कांड' के बाद अब दुर्ग की राजनीति में यह बहस छिड़ गई है कि यह महापौर का शहर के विकास के लिए 'एक्शन मोड' है या फिर अधिकारियों पर दबाव बनाने की 'धौंस'। फिलहाल, पुलिस ने स्थिति को शांत करा दिया है, लेकिन अधिकारियों और नगर निगम प्रशासन के बीच की खाई और गहरी हो गई है।

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