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आजादी की धुन समारोह में मुख्यमंत्री साय
आजादी की धुन समारोह में मुख्यमंत्री साय
रायपुर

आजादी की धुन में 100 युवा कलाकारों ने एक साथ छेड़ी देशभक्ति की तान, देशप्रेम से सराबोर हुआ माहौल

‘आजादी की धुन’ समारोह में 100 युवा कलाकारों ने विभिन्न वाद्ययंत्रों पर एक साथ देशभक्ति की धुनें प्रस्तुत कीं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद किया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 13 Aug 2026, 12:31 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 05:00 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

देशभक्ति के सुरों और संगीत की मधुर धुनों से गूंज उठी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित विशेष समारोह ‘आजादी की धुन’ में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से पहुंचे 100 युवा कलाकारों ने एक साथ विभिन्न वाद्ययंत्रों पर लाइव बैंड की प्रस्तुति दी। स्वतंत्रता दिवस से पहले आयोजित इस कार्यक्रम में देशभक्ति के गीतों और धुनों ने पूरे सभागार में राष्ट्रप्रेम का माहौल बना दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी समारोह में शामिल हुए और कलाकारों की प्रस्तुतियां देखकर उनका उत्साहवर्धन किया। बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने भी देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों का आनंद लिया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘आजादी की धुन’ देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के साथ स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है। 

सेनानियों के बलिदान को किया याद

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमें अपने गौरवशाली इतिहास की याद दिलाने के साथ वर्तमान में अपने कर्तव्यों का बोध कराते हैं और बेहतर भविष्य के निर्माण का संकल्प भी मजबूत करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार 100 युवा कलाकारों द्वारा एक साथ अलग-अलग वाद्ययंत्रों पर देशभक्ति की धुनों की प्रस्तुति अपने आप में अनूठा प्रयास है। उन्होंने आयोजन के लिए संस्कृति विभाग और इसमें शामिल सभी कलाकारों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संगीत में भावनाओं को जागृत करने और लोगों को एक सूत्र में जोड़ने की अद्भुत क्षमता होती है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी गीतों, कविताओं और नारों ने देशवासियों के भीतर स्वाधीनता की चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

‘आजादी की धुन’ समारोह में देशभक्ति के रंग में रंगा माहौल।

संगीत में लोगों को जोड़ने की शक्ति

देशभक्ति के गीतों ने कठिन परिस्थितियों में क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का मनोबल बढ़ाया तथा करोड़ों भारतीयों को आजादी के लक्ष्य के लिए एकजुट किया। उन्होंने कहा कि आज भी जब देशभक्ति की धुन सुनाई देती है, तो प्रत्येक भारतीय के मन में राष्ट्र के प्रति गर्व, सम्मान और समर्पण का भाव जागृत हो जाता है। इसी कारण संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी को देश के इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने के प्रयास महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों को याद करते हुए कहा कि देश को आजादी असंख्य बलिदानों और लंबे संघर्ष के बाद मिली है। 

बलिदानों से मिली देश को आजादी

अनेक क्रांतिकारियों ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, हजारों सेनानियों ने जेलों में कठोर यातनाएं सहीं और लाखों देशवासियों ने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित अनेक राष्ट्रनायकों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देशवासी स्वतंत्र वातावरण में अपने सपनों को साकार कर पा रहे हैं, तो इसके पीछे हमारे पूर्वजों का संघर्ष, तपस्या और त्याग है।

कर्तव्यों का भी कराती है बोध

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और दायित्वों का भी स्मरण कराती है। करोड़ों देशवासियों के संघर्ष और बलिदान से मिली आजादी की रक्षा करना, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाना और देश को लगातार प्रगति के रास्ते पर आगे ले जाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए। राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुए ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना ही स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति वास्तविक सम्मान होगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित अतिथियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों का आनंद लिया

सपूतों के योगदान को किया याद

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के गौरवशाली योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की धरती ने भी ऐसे अनेक वीर सपूतों को जन्म दिया, जिन्होंने अन्याय और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने अमर शहीद वीर नारायण सिंह को याद करते हुए कहा कि उन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों के अधिकारों के लिए ब्रिटिश शासन को चुनौती दी और मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। इसी तरह बस्तर के जननायक वीर गुण्डाधुर ने भूमकाल आंदोलन का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी समाज की आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन महान सेनानियों का शौर्य, संघर्ष और बलिदान छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

संघर्ष से जोड़ रहे ऐसे आयोजन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘आजादी की धुन’ जैसे कार्यक्रम विशेष रूप से युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन, उसके संघर्ष और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का काम करते हैं। नई पीढ़ी के लिए यह जानना जरूरी है कि जिस स्वतंत्र भारत में आज उन्हें अपने सपनों को साकार करने के अवसर मिल रहे हैं, उसके पीछे असंख्य ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष और त्याग रहा है। उन्होंने युवाओं से स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपनी प्रतिभा, मेहनत और क्षमता का उपयोग देश और समाज के विकास के लिए करना ही स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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