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16 मई को शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का दुर्लभ संयोग, बन रहे 8 विशेष योग, जानें क्यों खास है यह दिन

16 मई 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, शनिश्चरी अमावस्या, दर्श अमावस्या और शनिवार का दुर्लभ संयोग एक साथ बन रहा है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
09 May 2026, 05:21 PM
धार्मिक डेस्क

16 मई 2026 का दिन हिंदू पंचांग के अनुसार अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ संयोगों से भरा हुआ माना जा रहा है। इस दिन एक ही साथ कई बड़े धार्मिक अवसर और ज्योतिषीय योग बन रहे हैं, जिनमें शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, शनिश्चरी अमावस्या, दर्श अमावस्या और शनिवार का विशेष संयोग शामिल है।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इतने प्रभावशाली योगों का एक साथ बनना बेहद दुर्लभ होता है, जो साधना, पूजा-पाठ, दान और शनि उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

 शनि जयंती 2026: शनिदेव के जन्म का पावन दिन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को भगवान शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है।

इस बार खास बात यह है कि यह तिथि शनिवार के दिन पड़ रही है, जो स्वयं शनिदेव को समर्पित है। ऐसे में यह संयोग भक्तों के लिए अत्यंत शक्तिशाली और फलदायी माना जा रहा है।

 वट सावित्री व्रत का पुण्य पर्व

इसी दिन वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा, जो सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत में महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है।

 शनिश्चरी अमावस्या का विशेष प्रभाव

इस दिन शनिश्चरी अमावस्या का योग भी बन रहा है। अमावस्या और शनिवार का संयोग शनि उपासना के लिए सबसे शक्तिशाली माना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन की गई शनि पूजा से:

  • साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है
  • ढैय्या के कष्ट शांत होते हैं
  • जीवन में रुकावटें दूर होती हैं
  • करियर और व्यापार में सुधार आता है

दर्श अमावस्या: पितृ तर्पण का अवसर

16 मई को दर्श अमावस्या का योग भी बन रहा है, जिसे पितरों की शांति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस दिन तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पितृ दोष में कमी आने की मान्यता है।

एक ही दिन बन रहे 8 बड़े संयोग

ज्योतिष के अनुसार इस दिन निम्नलिखित प्रमुख संयोग एक साथ बन रहे हैं—

  1. शनि जयंती
  2. वट सावित्री व्रत
  3. शनिश्चरी अमावस्या
  4. दर्श अमावस्या
  5. शनिवार का विशेष योग
  6. अमावस्या तिथि का प्रभाव
  7. ज्येष्ठ मास का आरंभिक पावन काल
  8. शनि देव की विशेष कृपा का योग

क्यों माना जा रहा है यह दिन अत्यंत शक्तिशाली

ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि शनि देव न्याय के देवता हैं और कर्मों के अनुसार फल देते हैं। जब उनका जन्म दिवस, उनका प्रिय वार (शनिवार) और अमावस्या एक साथ आते हैं, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

इस दिन की गई पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है, क्योंकि यह कर्म सुधार और भाग्य परिवर्तन का अवसर प्रदान करती है।

शनि कृपा पाने के लिए क्या करें इस दिन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन निम्न उपाय अत्यंत लाभकारी माने गए हैं—

  • शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं
  • काले तिल और उड़द का दान करें
  • हनुमान चालीसा का पाठ करें
  • जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करें
  • पीपल वृक्ष की पूजा करें
  • “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें

 शनि दोष से परेशान लोगों के लिए खास अवसर

जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही है, उनके लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन की गई पूजा से मानसिक तनाव, आर्थिक बाधाएं और जीवन की रुकावटों में कमी आने की संभावना रहती है।

ज्योतिषाचार्यों की राय

ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के संयोग वर्षों में एक बार ही बनते हैं। अमावस्या, शनिवार और शनि जयंती का मिलना इसे और अधिक प्रभावशाली बना देता है।

यह दिन आत्मिक शुद्धि, पितृ शांति और शनि दोष निवारण के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

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