दूध से एक किलो पनीर तैयार करने में करीब 420 रुपए तक का खर्च आने का अनुमान है। दूसरी ओर, होटलों और ढाबों को बड़े पैमाने पर करीब 200 रुपए किलो की दर से पनीर सप्लाई किए जाने की बात सामने आई है। बाजार में खुले तौर पर करीब 360 रुपए किलो में बिक रहे पनीर की कीमत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लागत और बिक्री मूल्य में इतना बड़ा अंतर होने से पनीर की गुणवत्ता और उसमें मिलावट को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पनीर की गुणवत्ता को लेकर चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पनीर जैसा दिखने वाले एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई की गई है। दिल्ली में भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने पनीर के नमूनों की जांच शुरू की है। विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, असली पनीर तैयार करने की लागत करीब 420 रुपए प्रति किलो बैठती है।
खुले पनीर में मिलावट का खतरा ज्यादा
दिल्ली सरकार के फूड सेफ्टी विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ब्रांडेड कंपनियों के पनीर में मिलावट की संभावना तुलनात्मक रूप से कम मानी जाती है। इसकी वजह यह है कि कंपनी की पहचान स्पष्ट होती है और गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करना आसान रहता है। हालांकि, ब्रांडेड पनीर को भी जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा गया है।
क्या होता है एनालॉग पनीर
गंगाराम अस्पताल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. अनिल अरोड़ा के मुताबिक, सामान्य पनीर दूध से तैयार किया जाता है, जिसमें दूध से मिलने वाला प्रोटीन, फैट और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं। इसके विपरीत एनालॉग पनीर तैयार करने में वेजिटेबल प्रोटीन और स्टार्च जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें सामान्य पनीर की तुलना में प्रोटीन की मात्रा कम हो सकती है।
रेस्टोरेंट की थाली में असली पनीर पहचानना मुश्किल
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी रेस्टोरेंट में पनीर की सब्जी खाते समय आम ग्राहक के लिए यह पहचानना आसान नहीं है कि उसमें इस्तेमाल किया गया पनीर असली है या एनालॉग। पनीर पकने और मसाले के साथ परोसे जाने के बाद सिर्फ देखकर उसकी गुणवत्ता का पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है। ऐसे में निगरानी और सैंपल जांच की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की बनती है।
खुले में बिकने वाले पनीर की निगरानी ज्यादा चुनौतीपूर्ण है
बाजार में पहुंचने के बाद यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि पनीर किसने बनाया और इसकी सप्लाई कहां से हुई। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग को बड़े स्तर पर सैंपलिंग और जांच की जरूरत है। एनालॉग पनीर पर बैन की भी हुई चर्चा सूत्रों के अनुसार, सितंबर में हुई सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने को लेकर चर्चा हुई थी।
पैकेट वाले समान खरीदते समय पढ़ें एम्स की डायटिशियन
पैकेट वाला पनीर खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ें एम्स की डायटिशियन अंजली भोला ने सलाह दी है कि पैकेट बंद पनीर खरीदते समय ग्राहक उसके पीछे दिए गए Ingredients और Nutrition Information को जरूर देखें। इससे उत्पाद में इस्तेमाल की गई सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी के बारे में बेहतर अंदाजा लगाया जा सकता है।
आयोडीन से पनीर की जांच का तरीका
अंजली भोला के अनुसार, घर पर पनीर के एक छोटे टुकड़े को कुछ मिनट तक उबालकर ठंडा किया जा सकता है। इसके बाद उस पर आयोडीन की 2-3 बूंदें डालें। अगर पनीर का रंग नीला या काला दिखाई देने लगे तो यह स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। हालांकि, यह घरेलू तरीका केवल एक संकेत दे सकता है और किसी उत्पाद को निश्चित रूप से नकली या असुरक्षित साबित करने के लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी होती है।