8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) को औपचारिक मंजूरी दे दी है। सरकार के इस कदम से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के चेहरे खिल उठे हैं। इसका सीधा लाभ रक्षा, रेलवे, केंद्रीय विभागों के कर्मचारियों और सभी सेवानिवृत्त कर्मियों को मिलेगा। यह आयोग कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े सभी वित्तीय लाभों की नए सिरे से समीक्षा करेगा। हालांकि, आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करते समय देश की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय स्थिति और विकास योजनाओं के लिए जरूरी फंड का विशेष ध्यान रखना होगा।
वेतन और सुविधाओं में क्या-क्या बदलेगा?
आयोग कर्मचारियों के पूरे वेतन ढांचे में सुधार की सिफारिशें तैयार करेगा। इसमें मुख्य रूप से:
पे मैट्रिक्स और सैलरी स्ट्रक्चर: मूल वेतन और ग्रेड पे में जरूरी सुधार।
भत्ते: महंगाई भत्ता (DA), महंगाई राहत (DR) और मकान किराया भत्ता (HRA) का पुनर्मूल्यांकन।
प्रमोशन और इंक्रीमेंट: पदोन्नति की प्रक्रिया और वार्षिक वेतन वृद्धि के नियमों को बेहतर बनाना।
बेहतर टैलेंट और परफॉर्मेंस पर जोर
सरकार का इरादा वेतन ढांचे को ऐसा बनाने का है जिससे योग्य और प्रतिभावान लोग सरकारी नौकरियों की तरफ आकर्षित हों। इसके साथ ही, सरकारी काम-काज में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए परफॉर्मेंस व प्रोडक्टिविटी से जुड़े बोनस मॉडल की भी समीक्षा की जाएगी।
पेंशनर्स और ग्रैच्युटी के लिए क्या है खास?
आयोग नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए 'डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रैच्युटी' के प्रावधानों की समीक्षा करेगा। जो कर्मचारी इन योजनाओं के दायरे में नहीं हैं, उनके लिए भी पेंशन और ग्रैच्युटी से जुड़ी जरूरी सिफारिशें पेश की जाएंगी।
सिफारिशें कब होंगी लागू?
3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। इस हिसाब से आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट फरवरी या अप्रैल 2027 तक आ सकती है। पुरानी परिपाटी को देखें तो सिफारिशें आने के बाद उन्हें पूरी तरह जमीन पर उतरने में 2 से 3 साल का वक्त लग जाता है। इसका अर्थ यह है कि 2027 में प्रस्तावित होने वाली नई दरें कर्मचारियों और पेंशनर्स को 2029 या 2030 तक पूरी तरह मिलनी शुरू होंगी।

