India Pulses Market: भारत दालों की अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू सप्लाई में बदलाव का सीधा असर दालों की कीमतों पर पड़ता है। त्योहारों के सीजन से पहले बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार चना और पीली मटर के आयात शुल्क में कटौती पर विचार कर रही है।
चना और पीली मटर पर मौजूदा आयात शुल्क
फिलहाल चने के आयात पर 10 प्रतिशत और पीली मटर पर 30 प्रतिशत शुल्क लागू है। वहीं, तूर और उड़द के आयात पर 31 मार्च 2027 तक शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
घरेलू बाजार में इनकी उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना बताया जा रहा है।
एक महीने में 10 प्रतिशत तक बढ़े दाम
कमोडिटी कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, पिछले एक महीने में चना, मूंग, मटर और तूर जैसी प्रमुख दालों की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक की तेजी आई है।
मानसून की असमान बारिश बनी चुनौती
दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल करीब 12 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त होने की स्थिति में है। हालांकि, चिंता सिर्फ कुल बारिश कम होने की नहीं है, बल्कि कई कृषि क्षेत्रों में बारिश के असमान वितरण की भी है। कुछ इलाकों में लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति रही, जबकि कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई।
त्योहारी मांग बढ़ने और खरीफ फसल को लेकर बनी चिंता
बारिश की कमी से फसल पर असर की आशंका दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के मुताबिक, प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी का असर इस साल दालों के उत्पादन पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, खेती के महत्वपूर्ण चरण में पर्याप्त नमी नहीं मिलने से फसल की उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।दालों की बुवाई का क्षेत्र लगभग स्थिर कम
बारिश के बावजूद खरीफ दालों के कुल बुवाई क्षेत्र में बड़ी गिरावट नहीं आई है। 4 सितंबर तक देश में करीब 117.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दालों की बुवाई हुई थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 115.30 लाख हेक्टेयर था। हालांकि, मूंग की बुवाई इस साल 33.19 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष के 34.23 लाख हेक्टेयर से कम है।
उत्पादन को लेकर बढ़ी चिंता
मौसम में अनियमितता का असर अब सिर्फ बुवाई तक सीमित नहीं माना जा रहा है। अल नीनो के प्रभाव और बारिश की कमी के कारण फसल की उत्पादकता को लेकर भी चिंता बढ़ी है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों में बारिश की स्थिति पर कारोबारियों की खास नजर है।रकबा स्थिर, लेकिन उपज पर सवाल
देशभर में दालों की खेती का कुल रकबा फिलहाल बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन फसल के अहम विकास चरण में नमी की कमी उत्पादन घटा सकती है। ऐसे में बाजार में उपलब्ध दालों की मात्रा पर असर पड़ने की आशंका है, जिसका दबाव कीमतों पर दिखाई दे सकता है। ड्यूटी घटने से बढ़ सकती है बाजार में सप्लाई सरकार चना और पीली मटर पर आयात शुल्क कम करती है, तो इससे घरेलू बाजार में आयात के जरिए सप्लाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

