87 सालों की अटूट आस्था : 16 जुलाई को रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे महाप्रभु जगन्नाथ, तैयारियां पूरी
राजनांदगांव में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की 87 वर्षों पुरानी रथयात्रा 16 जुलाई को धूमधाम से निकाली जाएगी। गांधी चौक स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से शुरू होने वाली यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।
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कीर्तिमान न्यूज
15 Jul 2026, 08:38 AM
राजनांदगांव
राजनांदगांव एक बार फिर पूरी तरह से भक्ति के रंग में सराबोर होने के लिए तैयार है। शहर की ऐतिहासिक और करीब 87 वर्षों से अनवरत चली आ रही भगवान जगन्नाथ, भइया बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथयात्रा इस वर्ष 16 जुलाई को पूरे वैभव और हर्षोल्लास के साथ निकाली जाएगी।
इस महाआयोजन को लेकर पूरे शहर में उत्साह का माहौल है और तैयारियां अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। महाप्रभु के दर्शन के लिए भक्तों की आतुरता देखते ही बन रही है।उत्सव के दिन, यानी 16 जुलाई की सुबह 8:00 बजे से ही गांधी चौक स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का विशेष श्रृंगार, महापूजन और आरती की जाएगी। इसके बाद, सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जहाँ भक्त महाप्रसाद ग्रहण कर सकेंगे।
सैकड़ों श्रद्धालुओं को रथ खीचनें का इंतजार
दोपहर ठीक 2:30 बजे वह घड़ी आएगी जिसका शहरवासियों को सालभर से इंतजार रहता है। जय जगन्नाथ के जयकारों और शंखध्वनि के बीच प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को भव्य रथ पर विराजित किया जाएगा, जिसके बाद सैकड़ों श्रद्धालु आस्था की डोरी थामकर महाप्रभु के रथ को खींचेंगे। गांधी चौक से शुरू होकर यह दिव्य रथयात्रा शहर के मुख्य चौक-चौराहों और पारंपरिक मार्गों से होते हुए गुजरेगी। इस दौरान पूरे रास्ते में महाप्रभु का पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत करने की तैयारी है। जगह-जगह पर श्रद्धालु आरती उतारेंगे और छप्पन भोग अर्पित करेंगे।
जगन्नाथ मंदिर राजनांदगांवदेवशयानी तक श्री राम-जानकी मंदिर में विश्राम
यात्रा के दौरान अखाड़ों के हैरतअंगेज कारनामे, भजन-कीर्तन की मंडलियां और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस बार भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। नगर भ्रमण करते हुए यह रथयात्रा देर शाम पुरानी हेटरी स्थित श्री राम-जानकी मंदिर पहुंचेगी, जिसे अस्थाई तौर पर भगवान की 'मौसी का घर' (प्रवास स्थल) बनाया गया है। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महाप्रभु जगन्नाथ अपनी बहन और भाई के साथ देवशयनी एकादशी तक श्री राम-जानकी मंदिर में ही विश्राम करेंगे। इस दौरान हर दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद (भंडारे) की व्यवस्था रहेगी।
रूट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
एकादशी के पावन अवसर पर भगवान की 'बहुड़ा यात्रा' (वापसी यात्रा) शुरू होगी। प्रभु एक बार फिर रथ पर सवार होकर नगर का हालचाल जानने निकलेंगे और मुख्य जगन्नाथ मंदिर में पुनः प्रवेश करेंगे। इतने बड़े धार्मिक आयोजन को देखते हुए प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह मुस्तैद है। रथयात्रा के रूट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ट्रेफिक व्यवस्था को इस तरह प्लान किया गया है ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई परेशानी न हो और पूरी यात्रा शांति व सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके।