गोबर गैस संयंत्रों का पुनर्जीवन ग्रामीण भारत में ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक बेहद प्रभावी कदम साबित हो रहा है। यह पहल गांवों को महंगे एलपीजी (LPG) सिलेंडर पर निर्भरता से मुक्त कर पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए उत्तम जैविक खाद प्रदान करती है।
सफल रहा गैस परीक्षण
मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत रायगढ़ के सीधे मार्गदर्शन में इस संयंत्र का विस्तृत निरीक्षण एवं तकनीकी परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्रेडा (CREDA) की विशेष तकनीकी टीम, जिला पंचायत के आला अधिकारी तथा ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से संयंत्र का बारीकी से आकलन किया। आवश्यक मरम्मत और तकनीकी सुधार कार्य तत्काल पूरे किए गए। इसके बाद संयंत्र को सफलतापूर्वक चालू करके बायोगैस से सीधे चूल्हा जलाया गया।
महंगे एलपीजी से मिलेगी मुक्ति
कचरे से कंचन
यह बायोगैस संयंत्र केवल स्वच्छ ईंधन ही उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि गाँव के पर्यावरण को भी दुरुस्त रखता है। गाँव में इकट्ठा होने वाले गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों (Organic Waste) के प्रभावी व वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से यह पर्यावरण संरक्षण में अनूठी भूमिका निभा रहा है। इसके साथ ही, गैस बनने के बाद संयंत्र से निकलने वाली उत्तम श्रेणी की जैविक खाद (स्लरी) खेतों की उत्पादकता बढ़ाने में रामबाण साबित होगी,
जागरूकता अभियान
ग्रामीणों में खुशी की लहर
बड़े देवगांव के निवासियों ने इस संयंत्र के दोबारा शुरू होने पर प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए खुशी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें लकड़ी इकट्ठा करने या महंगे सिलेंडरों के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। स्वच्छ ईंधन मिलने से उनके समय की बचत होगी, स्वास्थ्य सुधरेगा और चूल्हे के धुएँ से होने वाली बीमारियों से भी मुक्ति मिलेगी।
