मध्य प्रदेश के बहुचर्चित चीता प्रोजेक्ट से जुड़े सूचना के अधिकार (RTI) मामलों में अब राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सूचना आयुक्त राजेश भट्ट ने परियोजना निदेशक उत्तम शर्मा को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे की शिकायत पर हुई सुनवाई के बाद की गई।
आयोग में कुल चार मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें से तीन मामलों में परियोजना निदेशक को व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारियां या तो उपलब्ध नहीं कराई गईं या फिर नियमों का हवाला देकर रोक दी गईं।
इन जानकारियों को लेकर मांगा गया था जवाब
आरटीआई के माध्यम से वर्ष 2024 में चीतों को बेहोश करने की अनुमति, उनके ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट, घायल चीतों के ऑपरेशन के बाद की मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कूनो नेशनल पार्क में निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की गई खनिज सामग्री, चीता प्रोजेक्ट पर बनी डॉक्यूमेंट्री की अनुमति और चीता अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों व डॉक्टरों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। शिकायत के अनुसार, परियोजना प्रबंधन ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(ए) और 8(1)(जे) का हवाला देते हुए कई जानकारियां देने से इनकार कर दिया। तर्क दिया गया कि इससे देश की सुरक्षा, संप्रभुता या व्यक्तिगत गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। वहीं कुछ सूचनाओं के लिए आवेदक से कथित रूप से अनुचित शुल्क भी मांगा गया।आरटीआई कानून के उल्लंघन का आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अजय दुबे ने आयोग के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2024 से अब तक आरटीआई अधिनियम का गंभीर उल्लंघन किया गया है। उनका कहना है कि परियोजना निदेशक उत्तम शर्मा ने स्वयं को लोक सूचना अधिकारी (PIO) और प्रथम अपीलीय अधिकारी दोनों की भूमिका में रखकर नियमों के विपरीत आदेश जारी किए। अजय दुबे ने आयोग से मांग की है कि आरटीआई अधिनियम के कथित उल्लंघन के लिए परियोजना निदेशक के खिलाफ जुर्माना लगाया जाए, विभागीय जांच कराई जाए और आवेदक को क्षतिपूर्ति भी प्रदान की जाए। अब इस मामले में आयोग की आगामी सुनवाई और परियोजना निदेशक के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं।