छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक तालाब में मगरमच्छ होने की खबर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में तेजी से फैल रही थी। तस्वीर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
मामला रामानुजनगर क्षेत्र के ग्राम केशवपुर का है। वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और रेस्क्यू टीम तत्काल तालाब पर पहुंची। टीम ने तालाब और आसपास के इलाके में काफी देर तक खोजबीन की, लेकिन कहीं भी मगरमच्छ के होने के कोई प्रमाण नहीं मिले। मगरमच्छ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित प्रजाति है, इसलिए ऐसी सूचना मिलने पर विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ती है।
जांच में सामने आया AI से तैयार की गई थी तस्वीर
मौके पर कुछ नहीं मिलने के बाद वन विभाग ने वायरल तस्वीर की गहन जांच की। जांच में पता चला कि केशवपुर निवासी बृजलाल यादव ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से मगरमच्छ की फर्जी तस्वीर तैयार की थी। इसके बाद उसने इस तस्वीर को कई व्हाट्सएप ग्रुपों में साझा कर दिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने खुद भी तस्वीर वायरल करने की बात स्वीकार कर ली। वायरल तस्वीर के कारण गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच भय और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। कई लोगों ने तालाब के पास जाने से परहेज करना शुरू कर दिया। वहीं, वन विभाग को भी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अतिरिक्त संसाधन और टीम लगानी पड़ी।वन विभाग की शिकायत पर पुलिस ने की कार्रवाई
मामले की पुष्टि होने के बाद वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ पुलिस थाने में लिखित शिकायत और प्रतिवेदन सौंपा। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर बृजलाल यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि झूठी सूचना के कारण विभाग को बेवजह रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा। इससे सरकारी संसाधनों, समय और कर्मचारियों का अनावश्यक उपयोग हुआ, जबकि इस दौरान अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित हुए। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।