पश्चिम एशिया में पिछले चार महीनों से जारी भारी तनाव और युद्ध की विभीषिका पर आखिरकार विराम लग गया है। अमेरिका और ईरान ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बुधवार को सहमति पत्र (MoU) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर बड़ी राहत देखी जा रही है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस MoU के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच पिछले 120 दिनों से चल रहा भीषण सैन्य संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो गया है। इस बीच, एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के प्रतिष्ठित 'पैलेस ऑफ वर्सेलिस' में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान एग्रीमेंट की हार्ड कॉपी पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए।
स्विट्जरलैंड समारोह पर सस्पेंस, समय से पहले हुई डील
इस ऐतिहासिक डील को अंतिम रूप देने और जश्न मनाने के लिए पहले स्विट्जरलैंड में एक भव्य समारोह का आयोजन तय किया गया था। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में तेजी से बदलते घटनाक्रम के कारण तय कार्यक्रम से पहले ही एमओयू पर साइन कर लिए गए।
ताजा स्थिति: अचानक बदले घटनाक्रम के बाद अब यह स्पष्ट नहीं है कि स्विट्जरलैंड में होने वाला आधिकारिक समारोह आयोजित किया जाएगा या उसे रद्द कर दिया गया है। विशेषज्ञ इसे दोनों देशों की जल्द से जल्द शांति बहाली की उत्सुकता के रूप में देख रहे हैं।
60 दिनों का कूलिंग-ऑफ पीरियड
ईरानी विदेश मंत्रालय और आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, डील साइन होने के बाद अगले 60 दिनों तक दोनों देशों को सख्त संयम (Cooling-off period) बरतना होगा। इस दौरान:
दोनों देश किसी भी प्रकार के आक्रामक राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य कदमों से पूरी तरह बचेंगे।
समझौते की शर्तों और आपसी विश्वास को मजबूत करने के लिए एक ज्वाइंट मॉनिटरिंग कमेटी नजर रखेगी।
किसी भी ऐसे बयान या कार्रवाई पर रोक रहेगी जो इस शांति समझौते पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हो।
कैसे शुरू हुआ था 4 महीने का यह महासंकट?
इस संघर्ष की शुरुआत इस साल 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर एक बड़ा सैन्य हमला कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीधी जंग छिड़ गई, जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था।
संघर्ष शुरू होते ही ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को ब्लॉक कर दिया था। इसके कारण:
दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) और एलपीजी की भारी किल्लत हो गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं, जिससे कई देशों में महंगाई का संकट पैदा हो गया।
वैश्विक बाजार के लिए राहत: 30 दिनों में खुलेगा होर्मुज
इस शांति समझौते की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आई है। एमओयू की शर्तों के तहत, ईरान अगले 30 दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोलने पर सहमत हो गया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तत्काल गिरावट दर्ज की गई है और वैश्विक शेयर बाजारों में भारी उछाल देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने मध्यस्थ के रूप में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इजरायल भी इस शांति समझौते का पूरी तरह समर्थन करता है और क्या अगले 60 दिनों तक अमेरिका-ईरान इस सीजफायर को बरकरार रख पाते हैं।