Ajay Singhal Story: भारतीय कारोबारी जगत में ऐसी कई कहानियां हैं, लेकिन अजय सिंघल की यात्रा खास है। हरियाणा के एक साधारण परिवार से आने वाले अजय ने महज 18 साल की उम्र में कारोबार की दुनिया में कदम रखा था। कभी ₹60,000 की पूंजी और एक ट्रक के सहारे शुरू हुआ उनका सफर आज ओम लॉजिस्टिक्स (Om Logistics) के रूप में एक बड़े कारोबारी समूह तक पहुंच चुका है। कंपनी का सालाना टर्नओवर ₹1,500 करोड़ से अधिक बताया जाता है।
रेडियो पार्ट्स के कारोबार से शुरू हुआ सफर
अजय सिंघल का जन्म हरियाणा में हुआ था। उन्होंने रोहतक गवर्नमेंट कॉलेज से प्री-इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। कम उम्र से ही कारोबार में उनकी दिलचस्पी थी। इसी रुचि के चलते उन्होंने 18 साल की उम्र में दिल्ली के वजीराबाद इलाके में अपने चाचा के साथ रेडियो पार्ट्स बनाने का काम शुरू किया। इस छोटे से व्यवसाय में शुरुआती निवेश करीब ₹3,000 था।
साल 1982 में एक ट्रक से शुरू किया ट्रांसपोर्ट कारोबार
अजय सिंघल ने वर्ष 1982 में ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कदम रखा। सीमित पूंजी के साथ उन्होंने एक छोटे से कार्यालय से काम शुरू किया। उस समय उनके पास केवल एक ट्रक था, लेकिन कारोबार को लेकर उनकी सोच पारंपरिक ट्रांसपोर्ट सेवाओं से अलग थी। उन्होंने सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने तक ही अपनी सेवाएं सीमित नहीं रखीं।
कम कीमत और बेहतर सेवा से मिली बड़ी कंपनियों की पहचान
अजय सिंघल ने कारोबार बढ़ाने के लिए कीमतों और सेवाओं, दोनों पर ध्यान दिया। बताया जाता है कि उस दौर में दिल्ली से मुंबई तक सामान पहुंचाने के लिए दूसरे ट्रांसपोर्टर जहां करीब ₹3,000 लेते थे, वहीं अजय ने इसी सेवा के लिए लगभग ₹1,200 का शुल्क रखा। उनकी प्रतिस्पर्धी कीमतों और काम करने के तरीके ने बाजार में अलग पहचान बनाने में मदद की।85 देशों तक पहुंचा ओम लॉजिस्टिक्स का कारोबार
एक ट्रक से शुरू हुई कंपनी का कारोबार समय के साथ कई गुना बढ़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ओम ग्रुप भारत में 1,500 से अधिक स्थानों और दुनिया के 85 देशों में अपनी सेवाएं देता है। कंपनी के साथ 5,000 से ज्यादा कर्मचारी जुड़े हैं। इसके अलावा, देश-विदेश में कंपनी के लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग से जुड़े स्थानों का कुल क्षेत्रफल 2 करोड़ वर्ग फीट से अधिक बताया जाता है।
छोटे निवेश से बड़े कारोबार तक पहुंचने की सीख
अजय सिंघल की कारोबारी यात्रा यह दिखाती है कि किसी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में शुरुआती पूंजी के साथ सही रणनीति, ग्राहकों की जरूरतों की समझ और लगातार बेहतर सेवा देना भी अहम होता है। रेडियो पार्ट्स के छोटे कारोबार से शुरुआत करने के बाद उन्होंने ट्रांसपोर्ट सेक्टर में अवसर पहचाना और धीरे-धीरे अपनी कंपनी का विस्तार किया।







