कुरुक्षेत्र जिले के दबखेड़ी गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने आबादी से सटे पानी के नाले में करीब 5 से 6 फुट लंबा मगरमच्छ देखा। मगरमच्छ के दिखाई देने की खबर कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गई, जिसके बाद इलाके में भय का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना एक-दूसरे को दी और नाले के आसपास लोगों की आवाजाही रोक दी गई। गांव के लोगों का कहना है कि नाले के किनारे बने डेरे में करीब 10 परिवार निवास करते हैं, जहां छोटे बच्चे और पालतू पशु भी रहते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के खुलेआम घूमने से किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।एहतियात के तौर पर लोगों ने बच्चों को अकेले बाहर भेजना बंद कर दिया है और पशुओं को भी नाले के पास नहीं ले जाया जा रहा।
जीव विभाग का रेस्क्यू अभियान
ग्रामीण लगातार प्रशासन से मगरमच्छ को जल्द पकड़ने की मांग कर रहे हैं ताकि क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो सके। घटना की जानकारी मिलते ही वन्य जीव विभाग की टीम तत्काल सक्रिय हो गई। सूचना के बाद अनुभवी गोताखोर प्रगट सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया।
मगरमच्छ को पकड़ने में नाकाम
मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने के लिए नाले में बड़े आकार का जाल बिछाया गया और कई घंटों तक लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया गया। टीम ने पानी के भीतर कई स्थानों पर तलाश की, लेकिन मगरमच्छ काफी देर तक छिपा रहा और पकड़ में नहीं आया। अधिकारियों का कहना है कि मगरमच्छ पानी के भीतर लंबे समय तक छिपे रहने और दिशा बदलने में माहिर होता है, इसलिए उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।नहर से गांव तक पहुंचने की आशंका
वन्य जीव विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिस नाले में मगरमच्छ देखा गया है, वह सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) और भाखड़ा नहर के जलमार्ग से जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि संभवतः मगरमच्छ इन्हीं जलमार्गों के जरिए बहते हुए गांव के नाले तक पहुंचा होगा। विभाग ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में मगरमच्छ दिखाई दिया हो। इससे पहले भी आसपास के क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बीते महीने 16 तारीख को दबखेड़ी से सटे नरकातरी गांव के नाले से करीब 6 फुट लंबा मगरमच्छ सुरक्षित रेस्क्यू कर वन्य क्षेत्र में छोड़ा गया था।