उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित जनसभा के बाद हुए कथित 'शुद्धिकरण' का मामला अब एक नया मोड़ लेता दिख रहा है। जिस विवाद को लेकर कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर थी, उसी मुद्दे पर अब पार्टी के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की हालिया बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपना दर्द बयां करते हुए अपनी ही पार्टी के नेताओं को कटघरे में खड़ा कर दिया।
विवाद में छोड़ दिया अकेला
खड़गे का आरोप है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर पार्टी के बड़े नेताओं ने उनका खुलकर साथ नहीं दिया और उन्हें इस पूरे विवाद में अकेला छोड़ दिया। बैठक के दौरान अपनी बात रखते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने बेहद दुखी मन से कहा कि हल्द्वानी की घटना बेहद दुखद थी, लेकिन इसके बावजूद CWC के शीर्ष नेताओं ने न तो खुलकर इसका विरोध किया और न ही संगठित होकर उनके समर्थन में खड़े हुए।
मीडिया में पकड़ रखने वाले नेताओं पर सवाल: खड़गे ने किसी का नाम लिए बिना उन नेताओं पर निशाना साधा, जिन्हें अक्सर मीडिया में अच्छी जगह मिलती है। उन्होंने कहा कि मीडिया में लगातार बने रहने वाले नेताओं ने भी इस मामले को प्रमुखता से नहीं उठाया।
वेणुगोपाल की सफाई पर असहमति: संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने जब यह कहकर स्थिति संभालने की कोशिश की कि नेताओं ने बयान दिए थे, तो खड़गे उनकी इस सफाई से सहमत नजर नहीं आए।
अपमान का विरोध संसद तक
यह पूरा मामला 8 अगस्त को हल्द्वानी में आयोजित कांग्रेस की 'विजय शंखनाद सभा' से जुड़ा है। इस जनसभा के मंच पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य मौजूद थे। ये सभी नेता दलित समुदाय से आते हैं। सभा समाप्त होने के बाद यह खबर आई कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उस जगह हवन कराकर कथित रूप से 'शुद्धिकरण' किया। कांग्रेस नेताओं ने इसे दलित समाज से आने वाले शीर्ष नेताओं का अपमान बताते हुए संसद तक में इसका कड़ा विरोध जताया था।
जांच कर दोषियों पर होगी कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने पर बीजेपी की ओर से जेपी नड्डा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस तरह की घटना को गलत करार दिया था और स्पष्ट किया था कि पार्टी ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करती। बीजेपी ने यह आश्वासन भी दिया था कि जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अब खड़गे के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दलों पर हमला बोलने वाली कांग्रेस अब खुद अपने ही अध्यक्ष को पार्टी के भीतर से पर्याप्त समर्थन न मिलने के आरोपों से घिरती नजर आ रही है।