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भारत के पोल्ट्री उद्योग का रेवेन्यू 7% तक बढ़ सकता है।
भारत के पोल्ट्री उद्योग का रेवेन्यू 7% तक बढ़ सकता है।
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अपना स्टार्टअप : मुर्गी पालन से होगी तगड़ी कमाई, अब पोल्ट्री में पैसा ही पैसा

भारत का पोल्ट्री उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार FY27 में इस सेक्टर के रेवेन्यू में करीब 7% तक वृद्धि हो सकती है। बढ़ती प्रोटीन खपत, शहरीकरण, संगठित उत्पादन और बेहतर फार्म मैनेजमेंट के चलते उद्योग की लाभप्रदता और कमाई में भी सुधार की उम्मीद जताई गई है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
18 Jul 2026, 02:30 PM
नई दिल्ली
भारत का पोल्ट्री उद्योग लगातार विस्तार कर रहा है और आने वाले वर्षों में इसकी रफ्तार और तेज होने की संभावना है। बढ़ती प्रोटीन खपत, शहरीकरण और संगठित कारोबार के विस्तार के चलते इस सेक्टर में काम करने वाले किसानों और कंपनियों के लिए बेहतर कमाई के अवसर बन रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 तक पोल्ट्री उद्योग के राजस्व और मुनाफे दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

2027 तक 7% बढ़ सकता है उद्योग का रेवेन्यू 

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में भारतीय पोल्ट्री उद्योग का कुल रेवेन्यू पिछले वर्ष की तुलना में करीब 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। साथ ही, उद्योग की लाभप्रदता में भी 50 से 100 बेसिस पॉइंट तक सुधार का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर मांग और उत्पादन क्षमता में वृद्धि इसका प्रमुख कारण होगी। 

बढ़ती प्रोटीन खपत से मिल रहा कारोबार को सहारा 

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में लोगों की खान-पान की आदतों में बदलाव, आय में बढ़ोतरी और शहरी आबादी के विस्तार के कारण अंडे और चिकन की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि भारत आज दुनिया के प्रमुख अंडा और पोल्ट्री मांस उत्पादक देशों में शामिल है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान भी उद्योग ने संतुलित उत्पादन, मजबूत मांग और बेहतर सप्लाई-डिमांड मैनेजमेंट के दम पर अच्छा प्रदर्शन किया। खासकर रिटेल, होटल, रेस्तरां और फूड सर्विस सेक्टर से मजबूत मांग मिलने के कारण उद्योग की स्थिति मजबूत बनी रही।

तकनीक और बेहतर प्रबंधन से बढ़ेगी उत्पादकता 

रिपोर्ट के अनुसार, संगठित कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक फार्म मैनेजमेंट, बेहतर फीड कन्वर्जन रेश्यो (FCR) और ऑपरेशनल दक्षता पर भी जोर दे रही हैं। इससे उत्पादन लागत नियंत्रित करने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी। इन सुधारों का सीधा असर उद्योग की कमाई और मुनाफे पर दिखाई देने की उम्मीद है। 

प्रोसेस्ड पोल्ट्री बाजार का भी हो रहा विस्तार 

देश में ऑर्गनाइज्ड रिटेल, क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR), कोल्ड चेन नेटवर्क और निर्यात के अवसर बढ़ने से प्रोसेस्ड पोल्ट्री उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। इससे उद्योग को लंबे समय में नए बाजार और बेहतर वैल्यू एडिशन के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पोल्ट्री उद्योग के लिए फीड यानी मुर्गियों के चारे की लागत अब भी सबसे बड़ा खर्च बनी हुई है। इसलिए चारे की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उद्योग की लाभप्रदता पर पड़ता रहेगा। 

भारत दुनिया के बड़े पोल्ट्री बाजारों में शामिल 

भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े पोल्ट्री बाजारों में गिना जाता है। वित्त वर्ष 2025 के दौरान देश में लगभग 149.11 अरब अंडों का उत्पादन हुआ, जबकि करीब 5.18 मिलियन टन पोल्ट्री मांस का उत्पादन दर्ज किया गया। यह देश के कुल मांस उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन से लेकर वितरण तक पूरी वैल्यू चेन में संगठित कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से गुणवत्ता, कार्यक्षमता और बाजार की चुनौतियों से निपटने की क्षमता मजबूत हुई है। लगातार बढ़ती मांग और उत्पादन क्षमता के विस्तार के चलते आने वाले वर्षों में भारतीय पोल्ट्री उद्योग की विकास दर मजबूत रहने की संभावना जताई गई है।
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