देश की राजधानी में आज राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज यानी गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक से ठीक एक दिन पहले पीएम मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
इस सुगबुगाहट को हवा तब और मिल गई जब बुधवार को केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
क्यों जरूरी हो गया है कैबिनेट में बदलाव?
दरअसल, मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में दो ऐसे चेहरे शामिल थे, जिनका संसद सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त हो चुका है। नियम के मुताबिक, बिना सांसद रहे कोई भी व्यक्ति छह महीने से ज्यादा मंत्री पद पर नहीं रह सकता।
जॉर्ज कुरियन: इन्होंने मर्यादा का पालन करते हुए कल ही मंत्री पद छोड़ दिया।
रवनीत सिंह बिट्टू: दूसरे मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जिन्होंने फिलहाल इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन उन पर भी नजरें टिकी हुई हैं।
बीजेपी ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में इन दोनों ही नेताओं को दोबारा मौका नहीं दिया था। ऐसे में यह साफ हो गया था कि संगठन अब इन्हें सरकार से मुक्त कर किसी नए समीकरण पर काम कर रहा है।
दलबदलुओं और नए चेहरों की लग सकती है लॉटरी!
पिछले कुछ महीनों में देश की राजनीति में बड़े उलटफेर हुए हैं। विपक्ष के कई दिग्गज सांसद अपनी पुरानी पार्टियां छोड़कर एनडीए (NDA) के खेमे में शामिल हो चुके हैं। माना जा रहा है कि खाली हुए मंत्री पदों पर इन नए साथियों को जगह देकर बीजेपी 'इनाम' भी दे सकती है और दोनों सदनों में अपनी स्थिति को और मजबूत भी कर सकती है।
चर्चाओं के बाजार में कुछ बड़े आंकड़े इस तरह हैं:
आम आदमी पार्टी (AAP): पिछले कुछ समय में 'आप' के करीब 7 सांसद बीजेपी का दामन थाम चुके हैं, जिनमें राघव चड्ढा का नाम भी सुर्खियों में रहा है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC): बंगाल की राजनीति में टीएमसी को बड़ा झटका लगा, जब उसके 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया और एनडीए को समर्थन का एलान कर दिया।
शिवसेना (UBT): उद्धव ठाकरे गुट को छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले 6 सांसदों का नाम भी इस रेस में है।
दावा किया जा रहा है कि इन नए चेहरों को सरकार या संगठन में कोई बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
मिशन 2027: यूपी और पंजाब चुनाव पर टिकी नजरें
बीजेपी का कोई भी कदम बिना चुनावी गणित के नहीं होता। अगले साल पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे बेहद महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। सूत्रों की मानें तो आज होने वाले फैसले पूरी तरह से इन्हीं चुनावों को केंद्र में रखकर लिए जाएंगे। कैबिनेट विस्तार में पंजाब और यूपी के चेहरों को खास तरजीह दी जा सकती है ताकि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधा जा सके।
अब देखना यह होगा कि आज की कैबिनेट बैठक के बाद पीएम मोदी के तरकश से कौन से नए तीर निकलते हैं और किसे दिल्ली के इस सियासी दंगल में बड़ी जिम्मेदारी मिलती है।