छत्तीसगढ़ में लंबे समय से शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग में रिक्त पड़े सहायक प्राध्यापकों के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। नवा रायपुर में 1 जुलाई को आयोजित उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने 700 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया जल्द प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
बैठक में विभागीय रिक्तियों को शीघ्र भरने पर विशेष जोर दिया गया। निर्णय के अनुसार राज्य के सरकारी महाविद्यालयों में 700 सहायक प्राध्यापकों की सीधी भर्ती की जाएगी। इसके साथ ही सभी स्नातक महाविद्यालयों में 31 जुलाई तक नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पदोन्नति और वेतनमान पर भी जल्द होगा फैसला
उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2019 से पहले नियुक्त सहायक प्राध्यापकों को पुराने नियमों के अनुसार पदोन्नति का लाभ देने का निर्णय लिया है। वरिष्ठ एवं प्रवर श्रेणी वेतनमान से संबंधित लंबित सूची भी जल्द जारी की जाएगी। वहीं, अतिथि प्राध्यापकों की सेवा शर्तों में सुधार को लेकर भी विभाग ने सकारात्मक रुख अपनाया है और इस संबंध में शीघ्र निर्णय लेने के संकेत दिए हैं। बैठक में सहायक ग्रेड-3 और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों पर भर्ती का भी फैसला लिया गया। इन पदों पर नियुक्तियां राज्य कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से की जाएंगी, ताकि विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरा जा सके। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों की अंग्रेजी बोलने और समझने की क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से '90 घंटे, 90 दिन' अंग्रेजी संप्रेषण पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक सुधारों पर जोर
इसके अलावा सभी सरकारी कॉलेजों में शैक्षणिक कैलेंडर का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बजट जारी करने से पहले प्रशासनिक स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में भी लागू किया जाएगा।
प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपर संचालक और प्राचार्य के पदों को अलग-अलग करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा महाविद्यालयों के प्राचार्यों के कार्यकाल का विशेष ऑडिट भी कराया जाएगा, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।