कृषि विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में किसानों को डीएपी खाद के नाम पर जैव उर्वरक बेचने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। सरसीवा थाना क्षेत्र के ग्राम गाड़ापाली में की गई कार्रवाई के बाद पुलकित बायोफर्टीलाइजर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
प्रशासन का कहना है कि आरोपियों ने लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को भ्रमित कर अपने उत्पाद की बिक्री की। गांव-गांव जाकर डीएपी बताकर बेचते थे उत्पाद प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले दो से तीन वर्षों से सरसीवा क्षेत्र में सक्रिय थे। वे सारंगढ़-बिलाईगढ़, जांजगीर-चांपा और शक्ति जिले के गांवों में पहुंचकर अपने उत्पाद को डीएपी खाद बताकर किसानों को बेचते थे।
बार-बार बदलते थे ठिकाना
किसानों को खरीद के दौरान बिल भी दिया जाता था, जिससे उन्हें उत्पाद की वास्तविकता पर संदेह नहीं होता था। हालांकि कृषि विभाग की जांच में पता चला कि जिस उत्पाद को डीएपी के रूप में बेचा जा रहा था, वह वास्तव में जैव उर्वरक था। अधिकारियों के अनुसार यह सामग्री हरियाणा के गुरुग्राम से मंगाई जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सुनसान इलाकों में किराये के मकानों में रहते थे और समय-समय पर अपना ठिकाना बदलते रहते थे। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा वे अपनी गतिविधियों को छिपाने और संदेह से बचने के लिए करते थे। कृषि विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष सरसीवा तहसील के ग्राम भिनौदा में भी इसी कंपनी का उत्पाद मिला था। उस समय उत्पाद तो बरामद हुआ था, लेकिन उससे जुड़े विक्रेताओं तक प्रशासन नहीं पहुंच पाया था।किसानों को सतर्क रहने की सलाह
इस बार संयुक्त कार्रवाई के दौरान चार आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सरसीवा थाने में मामला दर्ज कराया गया है। किसानों को सतर्क रहने की सलाह कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद और उर्वरक केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदें तथा हर खरीदारी का पक्का बिल अवश्य लें। यदि कोई व्यक्ति गांव में डीएपी के नाम पर संदिग्ध खाद बेचने का प्रयास करता है तो इसकी जानकारी तुरंत कृषि विभाग या नजदीकी पुलिस थाने को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।