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बरमकेला अपेक्स बैंक गबन
बरमकेला अपेक्स बैंक गबन
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सहकारी बैंक गबन : शाखा प्रबंधक समेत 3 कर्मचारी बर्खास्त, EOW करेगी जांच

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की बरमकेला शाखा में करीब 18.13 करोड़ रुपये के गबन मामले में अपेक्स बैंक ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शाखा प्रबंधक, लेखाधिकारी और लिपिक समेत कुल 8 कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया है। मामले की जांच जल्द ही EOW को सौंपी जाएगी, जबकि दोषियों से गबन की राशि की रिकवरी भी की जाएगी। साथ ही बैंक ने भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए निगरानी और तकनीकी व्यवस्था को और मजबूत करने की बात कही है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
25 Jun 2026, 08:37 AM
सारंगढ़-बिलाईगढ़

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की बरमकेला शाखा में सामने आए करीब 18.13 करोड़ रुपए के गबन मामले में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) ने कड़ा रुख अपनाया है। विस्तृत जांच के बाद बैंक ने शाखा के तत्कालीन प्रबंधक, लेखाधिकारी और एक लिपिक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

 इसके अलावा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत पांच कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका गबन में सामने आई है, उनसे नियमानुसार पूरी राशि की वसूली की जाएगी। यह कार्रवाई बैंक के अधिकृत अधिकारी केदार नाथ गुप्ता के निर्देश पर की गई है।

दोबारा जांच में खुला बड़ा वित्तीय घोटाला

केदार नाथ गुप्ता ने बताया कि शुरुआती जांच में लगभग एक करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोबारा विशेष जांच कराई गई, जिसमें खुलासा हुआ कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2024 के बीच शाखा में समितियों और किसानों के खातों के जरिए करीब 18.13 करोड़ रुपये की अनियमित वित्तीय लेन-देन की गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार, शाखा से जुड़ी विभिन्न समितियों के खातों से राशि डेबिट कर डीएमआर खातों के माध्यम से नियमों के विपरीत लेन-देन किए गए। इतना ही नहीं, किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) खातों में भी बिना उनकी अनुमति के रकम का ट्रांसफर और अन्य वित्तीय लेन-देन किए जाने के प्रमाण मिले हैं।

पहले ही दर्ज हो चुकी है एफआईआर

इस मामले में बैंक प्रबंधन ने 4 मई 2025 को बरमकेला थाने में आठ कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद उच्च स्तरीय जांच और विशेष ऑडिट की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके आधार पर अब अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। विशेष ऑडिट के बाद तत्कालीन शाखा प्रबंधक डी.आर. वाघमारे, लेखाधिकारी मीनाक्षी मांझी और लिपिक आशीष कुमार पटेल को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

वहीं आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत लिकेश कुमार बैरागी, रमाकांत श्रीवास, अरुण चंद्राकर, खीरदास महंत और बालकृष्ण कर्ष की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। बैंक प्रबंधन के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) को सौंपने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही एजेंसी पूरे वित्तीय घोटाले की जांच अपने हाथ में लेगी। बैंक ने भरोसा दिलाया है कि गबन में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और नियमों के अनुसार रिकवरी की जाएगी।

सहकारी बैंकों में लागू हो रही नई निगरानी व्यवस्था

भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सहकारी बैंकों में तकनीकी निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। केदार नाथ गुप्ता ने बताया कि अब ई-केसीसी पोर्टल के माध्यम से किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन करने के बाद ही ऋण वितरण किया जा रहा है। साथ ही बैंकिंग निरीक्षण, आंतरिक ऑडिट और पैक्स समितियों के कम्प्यूटरीकरण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि सभी लेन-देन अधिक पारदर्शी बन सकें। बैंक का कहना है कि वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था मजबूत होने का सकारात्मक असर उसके वित्तीय प्रदर्शन पर भी पड़ा है। वर्ष 2024-25 में बैंक ने 38.99 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 40.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

1451 समिति प्रबंधकों की भर्ती को मिली मंजूरी

सहकारी क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 1451 समिति प्रबंधकों की भर्ती को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। इसके अलावा प्रदेश में 515 नई पैक्स समितियों के गठन की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। 

बैंक प्रबंधन का मानना है कि इन कदमों से ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी सेवाओं का विस्तार होगा और किसानों को बेहतर एवं पारदर्शी बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

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