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नगर निकाय संपत्ति नियम 2026 लागू
नगर निकाय संपत्ति नियम 2026 लागू
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बड़ा बदलाव : छत्तीसगढ़ में नगर निकाय संपत्ति नियम 2026 लागू, अब सभी बिक्री ई-टेंडर से होगी

छत्तीसगढ़ सरकार ने नगर निकायों की अचल संपत्तियों (जमीन, दुकान, भवन आदि) के लेनदेन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अचल संपत्ति व्ययन) नियम, 2026 लागू किए हैं। इसके तहत अब सभी संपत्तियों की बिक्री, पट्टे या हस्तांतरण के लिए अनिवार्य रूप से ई-निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें सबसे अधिक बोली लगाने वाले को संपत्ति दी जाएगी।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
17 Jun 2026, 10:59 AM
रायपुर

छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों की अचल संपत्तियों—जैसे जमीन, दुकान, भवन और अन्य परिसंपत्तियों—की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण को लेकर बड़ा बदलाव किया है। राज्य में अब छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अचल संपत्ति व्ययन) नियम, 2026 लागू कर दिए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों की संपत्तियों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

नए नियमों के तहत अब किसी भी नगर निकाय की संपत्ति को बेचने, पट्टे पर देने या हस्तांतरित करने के लिए अनिवार्य रूप से ई-निविदा (e-tender) प्रक्रिया अपनानी होगी। इस व्यवस्था में संपत्ति उसी व्यक्ति या संस्था को दी जाएगी, जो निर्धारित प्रक्रिया में सबसे अधिक बोली लगाएगा

इसके साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि ई-निविदा की सूचना कम से कम 15 दिन पहले सार्वजनिक रूप से प्रकाशित की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग भाग ले सकें

पट्टे की अवधि और नवीनीकरण का प्रावधान तय

नए नियमों के अनुसार अब नगर निकायों की संपत्तियों को अधिकतम 30 वर्षों की पट्टे (लीज) अवधि के लिए दिया जा सकेगा। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर पट्टे के नवीनीकरण (renewal) का भी स्पष्ट प्रावधान रखा गया है, जिससे लंबी अवधि की योजनाओं को भी स्थिरता मिल सके। यदि किसी नगर निकाय की संपत्ति का मूल्य 50 करोड़ रुपये से अधिक है, तो उसे बेचने या हस्तांतरित करने से पहले राज्य सरकार की अनिवार्य मंजूरी लेनी होगी। इसके साथ ही संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े अधिकार रखने वाले अधिकारियों की वित्तीय सीमाएं भी निर्धारित कर दी गई हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया में अनुशासन बना रहे।

विवादित मामलों के निपटारे की स्पष्ट व्यवस्था

नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी संपत्ति को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो उसका निपटारा केवल सुनवाई और उचित प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी मामले में जल्दबाजी या मनमानी निर्णय की गुंजाइश न रहे।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी इन नियमों का मुख्य उद्देश्य नगर निकायों की संपत्तियों के उपयोग, आवंटन और बिक्री प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और डिजिटल प्रणाली आधारित बनाना है। सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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