दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय को शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि मिली है। केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अंबेडकर चेयर (शोध पीठ) स्थापित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
इसके साथ ही यह छत्तीसगढ़ का पहला विश्वविद्यालय बन गया है जहां इस तरह की प्रतिष्ठित शोध पीठ स्थापित की जाएगी। श्वविद्यालय प्रशासन को यह जानकारी डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के निदेशक मनोज तिवारी की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के माध्यम से प्राप्त हुई। यह मंजूरी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा प्रदान की गई है।
देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल हुआ विश्वविद्यालय
हर साल 75 लाख रुपये की मिलेगी आर्थिक सहायता
इस योजना के तहत विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार से प्रतिवर्ष 75 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा 10 लाख रुपये का एकमुश्त स्थापना अनुदान भी दिया जाएगा। इसमें 20 लाख रुपये शैक्षणिक गतिविधियों और 55 लाख रुपये वेतन व स्टाफ संबंधी खर्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं। प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त 1 करोड़ रुपये तक का रिसर्च फंड भी मिल सकता है।
योजना के अंतर्गत एक चेयर प्रोफेसर और एक सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति पांच वर्षों के लिए की जाएगी। साथ ही दो शोधार्थियों को डॉक्टोरल फैलोशिप दी जाएगी, जिसमें उन्हें 35 हजार रुपये मासिक के साथ एचआरए भी मिलेगा। यह व्यवस्था शोध कार्यों को नई दिशा देने में मदद करेगी।
अंबेडकर विचारधारा पर केंद्रित होगा शोध कार्य
शोध को मिलेगा नया आयाम
इस शोध पीठ की स्थापना से न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में सामाजिक न्याय, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए अवसरों का विस्तार होगा। यह पहल वंचित वर्गों के अध्ययन और नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
