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हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में डॉ अंबेडकर चेयर
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में डॉ अंबेडकर चेयर
दुर्ग

बड़ी उपलब्धि : डॉ. अंबेडकर चेयर की मंजूरी, छत्तीसगढ़ में पहली शोध पीठ स्थापित होगी

दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार से डॉ. भीमराव अंबेडकर चेयर (शोध पीठ) स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। यह छत्तीसगढ़ का पहला विश्वविद्यालय होगा जहां यह प्रतिष्ठित शोध केंद्र स्थापित किया जाएगा। इस योजना के तहत विश्वविद्यालय को हर साल 75 लाख रुपये की वित्तीय सहायता और अतिरिक्त रिसर्च फंड भी मिलेगा।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
13 Jun 2026, 11:14 AM
दुर्ग

दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय को शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि मिली है। केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अंबेडकर चेयर (शोध पीठ) स्थापित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

इसके साथ ही यह छत्तीसगढ़ का पहला विश्वविद्यालय बन गया है जहां इस तरह की प्रतिष्ठित शोध पीठ स्थापित की जाएगी। श्वविद्यालय प्रशासन को यह जानकारी डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के निदेशक मनोज तिवारी की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के माध्यम से प्राप्त हुई। यह मंजूरी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा प्रदान की गई है।

देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल हुआ विश्वविद्यालय

डॉ. अंबेडकर चेयर योजना के तहत अब तक देश के केवल 24 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता (MoU) किया गया है। इनमें जेएनयू, बीएचयू वाराणसी, पटना विश्वविद्यालय और आईआईएम विशाखापट्टनम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। अब इस सूची में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय का नाम भी जुड़ गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि उन्होंने नई दिल्ली जाकर डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के समक्ष विश्वविद्यालय का विस्तृत प्रस्ताव और प्रस्तुति दी थी। इसमें छत्तीसगढ़ की सामाजिक संरचना, जनजातीय क्षेत्रों की स्थिति और वंचित वर्गों के लिए शोध की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा गया।

हर साल 75 लाख रुपये की मिलेगी आर्थिक सहायता

इस योजना के तहत विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार से प्रतिवर्ष 75 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा 10 लाख रुपये का एकमुश्त स्थापना अनुदान भी दिया जाएगा। इसमें 20 लाख रुपये शैक्षणिक गतिविधियों और 55 लाख रुपये वेतन व स्टाफ संबंधी खर्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं। प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त 1 करोड़ रुपये तक का रिसर्च फंड भी मिल सकता है।

योजना के अंतर्गत एक चेयर प्रोफेसर और एक सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति पांच वर्षों के लिए की जाएगी। साथ ही दो शोधार्थियों को डॉक्टोरल फैलोशिप दी जाएगी, जिसमें उन्हें 35 हजार रुपये मासिक के साथ एचआरए भी मिलेगा। यह व्यवस्था शोध कार्यों को नई दिशा देने में मदद करेगी।

अंबेडकर विचारधारा पर केंद्रित होगा शोध कार्य

इस शोध पीठ का मुख्य उद्देश्य डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी विकास के विचारों को आगे बढ़ाना है। इसके तहत अध्ययन, शोध, शैक्षणिक गतिविधियाँ और जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। कुलपति प्रो. तिवारी के अनुसार योजना की शर्तों के तहत हर वर्ष कम से कम दो यूजीसी केयर सूची में शामिल शोध-पत्र और एक संपादित पुस्तक प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय जल्द ही विस्तृत प्रस्ताव भेजेगा, जिसके बाद डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के साथ औपचारिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

शोध को मिलेगा नया आयाम

इस शोध पीठ की स्थापना से न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में सामाजिक न्याय, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए अवसरों का विस्तार होगा। यह पहल वंचित वर्गों के अध्ययन और नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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