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नकली आधार के सहारे जमीन  की रजिस्ट्री
नकली आधार के सहारे जमीन की रजिस्ट्री
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बड़ा खेल : मृत किसान के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री, सरपंच के संदेह ने खोली पोल   

जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाने के सरकारी दावों के बीच गरियाबंद जिले की अमलीपदर तहसील से जालसाजी का गंभीर मामला सामने आया है। बजाड़ी हल्का में एक व्यक्ति ने पर नकली आधार कार्ड के सहारे ढाई एकड़ कृषि भूमि की रजिस्ट्री अपने नाम से करा ली। हालांकि, ग्राम पंचायत स्तर पर नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान सरपंच की सतर्कता से पूरा मामला उजागर हो गया और जमीन का नामांतरण रुक गया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 09 Jul 2026, 12:12 PM · अपडेट: 10 Sep 2026, 07:32 AM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाने के सरकारी दावों के बीच गरियाबंद जिले की अमलीपदर तहसील से जालसाजी का गंभीर मामला सामने आया है। बजाड़ी हल्का में एक व्यक्ति ने  पर नकली आधार कार्ड के सहारे ढाई एकड़ कृषि भूमि की रजिस्ट्री अपने नाम से करा ली। हालांकि, ग्राम पंचायत स्तर पर नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान सरपंच की सतर्कता से पूरा मामला उजागर हो गया और जमीन का नामांतरण रुक गया। 

जिस्ट्री के बाद शुरू हुई जांच 

जानकारी मिलने के बाद देवभोग उपपंजीयक कार्यालय के प्रभारी सहायक पंजीयक अजय चंद्रवंशी ने जांच शुरू कर दी है। मामला अमलीपदर तहसील के ग्राम बजाड़ी स्थित खसरा नंबर-12 की करीब ढाई एकड़ कृषि भूमि से जुड़ा है। यह जमीन हरिसिंह के नाम दर्ज थी, जिसकी रजिस्ट्री 15 अप्रैल 2025 को तत्कालीन सहायक पंजीयक चितेश देवांगन की उपस्थिति में उरमाल निवासी शांतिलाल जैन के नाम करीब डेढ़ लाख रुपये में की गई। ग्राम सरपंच यशोदा नेताम ने दस्तावेजों में दर्ज विक्रेता की पहचान पर संदेह जताते हुए नामांतरण पर आपत्ति दर्ज कर दी। ग्राम पंचायत प्रतिनिधि दुर्बल नेताम के अनुसार, रजिस्ट्री में जिस व्यक्ति को भूमि स्वामी बताया गया, वह गांव में कभी नहीं रहा।  

ग्रामीणों ने उठाए जमीन के स्वामित्व पर सवाल 

ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन दशकों से गांव की जानकारी में परती थी और बाद में ग्राम देवी की सेवा करने वाले तुकाराम कुम्हार के परिवार को दान में दी गई थी। ऐसे में अचानक 39 वर्षीय व्यक्ति के नाम पर इस जमीन की खरीदी-बिक्री होने से ग्रामीणों में भी सवाल उठने लगे। रजिस्ट्री के दौरान हरिसिंह नागेश (पिता लक्ष्मण) के नाम से जिस आधार नंबर का इस्तेमाल किया गया, वह वास्तव में वार्ड क्रमांक-2 निवासी हरिराम नागेश (पिता जयमल नागेश) का निकला।  

फायदा फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया 

आरोप है कि उसने पिता के नाम की समानता का फायदा उठाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और खरीदार से मिले चेक की राशि ग्रामीण बैंक स्थित खाते से निकाल ली। जांच में यह भी सामने आया कि इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश नई नहीं थी। संबंधित भूमि मूल रूप से देवभोग तहसील के कैठपदर निवासी हरिसिंह नागेश को सरकारी आवंटन के तहत मिली थी। उनकी मृत्यु मार्च 2018 में हो गई थी। बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में भंवरलाल की पत्नी प्रभंजली ने मैनपुर तहसील में फौती दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया था। 

पिता बताकर जमीन पर नाम दर्ज कोशिश 

हालांकि, इश्तहार जारी होने के बाद आपत्तियां आने पर यह प्रयास सफल नहीं हो सका। जाली आधार कार्ड के सहारे हुई रजिस्ट्री ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रभारी सहायक पंजीयक अजय चंद्रवंशी ने बताया कि जिस समय यह रजिस्ट्री हुई, उस दौरान आधार की ई-केवाईसी अनिवार्य नहीं थी। ऐसे में प्रस्तुतकर्ता और गवाहों के आधार पर दस्तावेजों का पंजीयन किया जाता था।  
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