Bagbahara NH Road News: भूसा परिवहन की लापरवाही से एनएच किनारे उग रहे धान के पौधे
Bagbahara NH Road News: महासमुंद जिले के बागबाहरा में भूसा परिवहन के दौरान सड़क पर गिरे धान के दाने बारिश के बाद डिवाइडर किनारे उग आए हैं। NH पर कई जगह धान के पौधों की कतार दिखाई दे रही है। वहीं सड़क पर बिखरा भूसा टायरों के नीचे दबकर धूल बन रहा है, जिससे दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी हो रही है।
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कीर्तिमान नेटवर्क | मयंक शर्मा
08 Sep 2026, 01:56 PM
बागबाहरा
Bagbahara NH Road News: एनएच पर इन दिनों तस्वीर कुछ ऐसी है—भूसा सड़क पर गिरा, टायरों के नीचे पिसा, धूल दुकानों तक पहुंची और उसी भूसे में बचा धान बारिश पाकर डिवाइडर किनारे पौधों की कतार के रूप में उग आया। यानी लापरवाही की शुरुआत भूसे से हुई और अंत ‘धान की खेती’ पर जाकर हुआ। ओडिशा की ओर से शहर में प्रवेश करते ही डिवाइडर शुरू होते हैं और उसके किनारे-किनारे धान के पौधे एक लाइन में ऐसे दिखाई देते हैं, मानो रोपा लगाने वाली मशीन से धान लगाया गया हो। कई स्थानों पर पौधों की ऊंचाई डेढ़ से दो फीट तक पहुंच चुकी है। दूसरी ओर, सड़क पर बिखरा भूसा धूल बनकर आसपास की दुकानों और राहगीरों तक पहुंच रहा है।
भूसे के साथ गिरे दाने, डिवाइडर किनारे उगा धान
धान का भूसा बड़ी मात्रा में वाहनों से ढोया जाता है। परिवहन के दौरान वाहनों से भूसा सड़क पर गिरता रहता है। इसके साथ भूसे में बचे धान के दाने भी सड़क और डिवाइडर किनारे गिर जाते हैं। बारिश और नमी मिलने के बाद यही दाने अंकुरित होकर पौधों में बदल गए। ओडिशा की ओर से बागबाहरा में प्रवेश करते ही डिवाइडर शुरू होने के साथ इन पौधों की कतार दिखाई देने लगती है। कहीं पौधे कम हैं तो कहीं घने। कई स्थानों पर इनकी ऊंचाई डेढ़ से दो फीट तक पहुंच चुकी है। पौधों की कतार कुछ जगह इतनी सीधी और एक जैसी दिखाई देती है कि पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे रोपा लगाने वाली मशीन से इन्हें लगाया गया हो।
एनएच पर वाहनों की लगातार आवाजाही से उठने वाली हवा जब पौधों से टकराती है तो वे एक साथ झूमते हैं। कुछ दूरी से यह नजारा सड़क किनारे धान की कतार जैसा दिखाई देता है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां न खेत तैयार हुआ और न किसी किसान ने रोपा लगाया।
भूसा परिवहन की लापरवाही का असर केवल डिवाइडर किनारे उगे पौधों तक सीमित नहीं है। सड़क पर गिरा भूसा वाहनों के टायरों के नीचे लगातार दबकर बारीक होता जाता है। सूखने के बाद यही भूसा धूल में बदलकर वाहनों की आवाजाही के साथ हवा में उड़ता है। एनएच किनारे स्थित दुकानों तक यह भूसा और उसकी धूल पहुंच रही है। दुकानों के भीतर और सामान पर धूल की परत जम रही है। दुकानदारों को बार-बार सफाई करनी पड़ रही है। सड़क किनारे व्यापार करने वालों के लिए यह रोज की परेशानी बन चुकी है।
रोड किनारे उगे धान के पौधेआंखों और मुंह तक पहुंच रहा भूसा
उड़ते भूसे से राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल चलने वालों, साइकिल और दोपहिया वाहन चालकों का कहना है कि कई बार हवा के साथ उड़ता भूसा सीधे आंखों में चला जाता है। आंख में भूसा जाने से अचानक जलन और परेशानी होती है। कई बार भूसा मुंह में जाने की शिकायत भी सामने आती है।
खासकर तेज गति से गुजरने वाले वाहनों के पीछे चल रहे दोपहिया और साइकिल चालकों को इसका अधिक सामना करना पड़ता है। आंख में भूसा चले जाने के बाद वाहन चलाते समय स्थिति और असहज हो जाती है। इसके बावजूद सड़क पर उड़ते भूसे को रोकने के लिए राहगीरों के पास कोई उपाय नहीं है। धीरे-धीरे यह परेशानी लोगों की रोजमर्रा की आदत में शामिल होती जा रही है और लोग इसे मजबूरी में सहने को विवश हैं।
लापरवाही के निशान अब डिवाइडर पर दिखाई दे रहे
कुछ हिस्सों में सफाई के बाद सड़क किनारे भूसा कम दिखाई देता है, लेकिन जहां भूसे के साथ गिरे धान के दाने मिट्टी और नमी के संपर्क में आए, वहां पौधों की कतार अब भी साफ नजर आ रही है। कई जगह डेढ़ से दो फीट तक ऊंचे पौधे इस बात का प्रमाण हैं कि परिवहन के दौरान कितनी मात्रा में भूसा और उसके साथ धान के दाने सड़क पर गिरे होंगे। खेत में धान लगाने के लिए किसान को जुताई, तैयारी और रोपाई तक मेहनत करनी पड़ती है। यहां भूसा ढोने के दौरान गिरे दानों को बारिश का सहारा मिला और डिवाइडर किनारे धान के पौधे उग आए।
ढककर सामग्री ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित हो
रोपा लगाने वाली मशीन से लगाए गए पौधों जैसी दिखाई देने वाली यह कतार अब भूसा परिवहन की लापरवाही पर अपने आप में एक व्यंग्य बन गई है। जरूरत है कि भूसा परिवहन करने वाले वाहनों को पूरी तरह ढककर सामग्री ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे सड़क पर भूसा गिरने और उससे उड़ने वाली धूल की समस्या कम होगी तथा दुकानदारों, पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों को भी राहत मिलेगी।