Tuesday, 08 Sep 2026 भारत
ब्रेकिंग
Ganja Smuggling Case: दुर्ग बस स्टैंड पर गांजा बेचते महाराष्ट्र का युवक गिरफ्तार, 2.5 किलो गांजा बरामद Korba Suicide Case: मोबाइल की लत बनी जानलेवा, नेटवर्क नहीं आने से नाराज महिला ने उठाया खौफनाक कदम Ganesh Chaturthi: देश के इन 5 प्रसिद्ध गणेश मंदिरों और उत्सव स्थलों पर दिखेगी बप्पा की भव्यता Chhattisgarh Panchayat Election: उम्र साबित करने के लिए आधार और वोटर ID मान्य नहीं, 10वीं की मार्कशीट ही अंतिम प्रमाण Raipur Murder Case: 1 करोड़ की जमीन बनी हत्या की वजह, दामाद ने ससुर की ले ली जान Chhattisgarh Crime News: शिक्षक के घर से लाखों के गहने और नकदी पार, शक के घेरे में आई घरेलू सहायिका Ganja Smuggling Case: दुर्ग बस स्टैंड पर गांजा बेचते महाराष्ट्र का युवक गिरफ्तार, 2.5 किलो गांजा बरामद Korba Suicide Case: मोबाइल की लत बनी जानलेवा, नेटवर्क नहीं आने से नाराज महिला ने उठाया खौफनाक कदम Ganesh Chaturthi: देश के इन 5 प्रसिद्ध गणेश मंदिरों और उत्सव स्थलों पर दिखेगी बप्पा की भव्यता Chhattisgarh Panchayat Election: उम्र साबित करने के लिए आधार और वोटर ID मान्य नहीं, 10वीं की मार्कशीट ही अंतिम प्रमाण Raipur Murder Case: 1 करोड़ की जमीन बनी हत्या की वजह, दामाद ने ससुर की ले ली जान Chhattisgarh Crime News: शिक्षक के घर से लाखों के गहने और नकदी पार, शक के घेरे में आई घरेलू सहायिका
W 𝕏 f
होम चुनाव Chhattisgarh Panchayat Election: उम्र साबित करने …
High Court verdict on panchayat election age dispute (Image Source: social media)
High Court verdict on panchayat election age dispute (Image Source: social media)
🔴 BREAKING चुनाव Featured

Chhattisgarh Panchayat Election: उम्र साबित करने के लिए आधार और वोटर ID मान्य नहीं, 10वीं की मार्कशीट ही अंतिम प्रमाण

Chhattisgarh Panchayat Election: हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की उम्र को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड और वोटर आईडी में दर्ज जन्म तिथि उम्र का अंतिम प्रमाण नहीं मानी जा सकती। चुनाव लड़ने की पात्रता तय करने के लिए 10वीं की मार्कशीट, स्कूल रिकॉर्ड और आधिकारिक जन्म पंजीकरण जैसे दस्तावेज अधिक विश्वसनीय होंगे।

कीर्तिमान न्यूज
08 Sep 2026, 12:16 PM
बिलासपुर
Chhattisgarh Panchayat Election: उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की उम्र की प्रामाणिकता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड में दर्ज जन्म तिथि को उम्र का ठोस आधार नहीं माना जा सकता। चुनाव लड़ने की पात्रता तय करने के लिए शैक्षणिक दस्तावेज—विशेष रूप से 10वीं कक्षा की मार्कशीट और स्कूल के शुरुआती रिकॉर्ड—ही सबसे विश्वसनीय प्रमाण होंगे। यह मामला बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत कृष्णानगर का है। यहां आयोजित हुए पंचायत चुनाव में जसिला तिथियो ने सरपंच पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। 

नियमों के हिसाब से नामांकन अमान्य 

चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई और 22 फरवरी 2025 को आए नतीजों में सबसे अधिक मत हासिल कर जसिला तिथियो सरपंच चुन ली गईं। हालांकि, उनकी इस जीत को प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सूरजपती राम ने इलेक्शन ट्रिब्यूनल (चुनाव अधिकरण) में चुनौती दी। याचिका में दावा किया गया कि पहली कक्षा से लेकर मैट्रिक तक के सभी स्कूल दस्तावेजों में जसिला की वास्तविक जन्म तिथि 12 अप्रैल 2004 दर्ज है। इस हिसाब से नामांकन पर्चा भरते समय उनकी उम्र मात्र 19 वर्ष थी, जो कि नियम के मुताबिक अमान्य है। 

हाईकोर्ट का किया रूख 

मामले की जांच और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद इलेक्शन ट्रिब्यूनल ने 25 सितंबर 2025 को सूरजपती राम की याचिका स्वीकार कर ली और जसिला के निर्वाचन को शून्य (रद्द) घोषित कर दिया। इस फैसले के खिलाफ जसिला तिथियो (पति रंजीत दास) ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में उन्होंने दलील दी कि वह चुनाव के समय लगभग 23 वर्ष की थीं और उनका नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जांच के बाद ही स्वीकार किया गया था। 

पिटीशन दायर होने के बाद बनवाय बर्थ सर्टिफिकेट 

हाईकोर्ट में सुनवाई के समय जसिला की ओर से 5 जुलाई 2025 को अपडेट कराया गया एक जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें उनकी जन्म तिथि 12 अप्रैल 2002 दर्ज थी। लेकिन अदालत ने इस दस्तावेज को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह बर्थ सर्टिफिकेट इलेक्शन पिटीशन दायर होने के बाद बनवाया गया है, इसलिए इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-एफ (Article 243F) के तहत पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना अनिवार्य है। 

मैट्रिक सर्टिफिकेट ही जन्म पंजीकरण के लिए सर्वोपरि 

अदालत ने अपने फैसले में रेखांकित किया कि जब उम्र के सत्यापन का प्रश्न उठता है, तो मान्यता प्राप्त बोर्ड का मैट्रिक सर्टिफिकेट, प्राथमिक स्कूल का एडमिशन रजिस्टर और आधिकारिक जन्म पंजीकरण ही सर्वोपरि होते हैं। आधार या वोटर कार्ड जैसे पहचान पत्र महज पहचान के साधन हैं, वे जन्म तिथि का अचूक वैधानिक प्रमाण नहीं बन सकते। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने इलेक्शन ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराते हुए जसिला तिथियो की रिट याचिका को खारिज कर दिया। 
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
देश
विदेश
सरकारी सूचना
राजनीति
खेल
मनोरंजन
कारोबार
कीर्तिमान विशेष
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें