Chhattisgarh Panchayat Election: उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की उम्र की प्रामाणिकता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड में दर्ज जन्म तिथि को उम्र का ठोस आधार नहीं माना जा सकता। चुनाव लड़ने की पात्रता तय करने के लिए शैक्षणिक दस्तावेज—विशेष रूप से 10वीं कक्षा की मार्कशीट और स्कूल के शुरुआती रिकॉर्ड—ही सबसे विश्वसनीय प्रमाण होंगे। यह मामला बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत कृष्णानगर का है। यहां आयोजित हुए पंचायत चुनाव में जसिला तिथियो ने सरपंच पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था।
नियमों के हिसाब से नामांकन अमान्य
चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई और 22 फरवरी 2025 को आए नतीजों में सबसे अधिक मत हासिल कर जसिला तिथियो सरपंच चुन ली गईं। हालांकि, उनकी इस जीत को प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सूरजपती राम ने इलेक्शन ट्रिब्यूनल (चुनाव अधिकरण) में चुनौती दी। याचिका में दावा किया गया कि पहली कक्षा से लेकर मैट्रिक तक के सभी स्कूल दस्तावेजों में जसिला की वास्तविक जन्म तिथि 12 अप्रैल 2004 दर्ज है। इस हिसाब से नामांकन पर्चा भरते समय उनकी उम्र मात्र 19 वर्ष थी, जो कि नियम के मुताबिक अमान्य है।
हाईकोर्ट का किया रूख
मामले की जांच और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद इलेक्शन ट्रिब्यूनल ने 25 सितंबर 2025 को सूरजपती राम की याचिका स्वीकार कर ली और जसिला के निर्वाचन को शून्य (रद्द) घोषित कर दिया। इस फैसले के खिलाफ जसिला तिथियो (पति रंजीत दास) ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में उन्होंने दलील दी कि वह चुनाव के समय लगभग 23 वर्ष की थीं और उनका नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जांच के बाद ही स्वीकार किया गया था।
पिटीशन दायर होने के बाद बनवाय बर्थ सर्टिफिकेट
हाईकोर्ट में सुनवाई के समय जसिला की ओर से 5 जुलाई 2025 को अपडेट कराया गया एक जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें उनकी जन्म तिथि 12 अप्रैल 2002 दर्ज थी। लेकिन अदालत ने इस दस्तावेज को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह बर्थ सर्टिफिकेट इलेक्शन पिटीशन दायर होने के बाद बनवाया गया है, इसलिए इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-एफ (Article 243F) के तहत पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना अनिवार्य है।मैट्रिक सर्टिफिकेट ही जन्म पंजीकरण के लिए सर्वोपरि
अदालत ने अपने फैसले में रेखांकित किया कि जब उम्र के सत्यापन का प्रश्न उठता है, तो मान्यता प्राप्त बोर्ड का मैट्रिक सर्टिफिकेट, प्राथमिक स्कूल का एडमिशन रजिस्टर और आधिकारिक जन्म पंजीकरण ही सर्वोपरि होते हैं। आधार या वोटर कार्ड जैसे पहचान पत्र महज पहचान के साधन हैं, वे जन्म तिथि का अचूक वैधानिक प्रमाण नहीं बन सकते। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने इलेक्शन ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराते हुए जसिला तिथियो की रिट याचिका को खारिज कर दिया।

