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आषाढ़ मास के शुभारंभ पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा-अर्चना
आषाढ़ मास के शुभारंभ पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा-अर्चना
धर्म

आषाढ़ मास का शुभारंभ : भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की आराधना का पावन समय शुरू

पूर्णिमा तिथि के समापन के साथ हिंदू पंचांग का पवित्र आषाढ़ मास शुरू हो गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा, दान-पुण्य, जप-तप और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व रखता है। आषाढ़ मास में आने वाली देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का भी आरंभ होता है, जिसे सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान देशभर के विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों का क्रम शुरू हो गया है।

कीर्तिमान नेटवर्क
01 Jun 2026, 04:36 PM
नई दिल्ली
हिंदू पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि के समापन के साथ ही पवित्र आषाढ़ मास का शुभारंभ हो गया है। सनातन धर्म में आषाढ़ महीने का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह माह भगवान विष्णु की उपासना, धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आषाढ़ मास वर्षा ऋतु के आगमन का संकेतक भी माना जाता है। प्रकृति में हरियाली और नवजीवन के साथ यह माह आध्यात्मिक जागरण का संदेश देता है। इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु की आराधना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

वामन स्वरूप की पूजा 

आषाढ़ मास में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। वामन भगवान विष्णु का पांचवां अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने राजा बलि के अहंकार का अंत कर धर्म की स्थापना की थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने वामन स्वरूप का पूजन करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। श्रद्धालु प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, पीले वस्त्र और प्रसाद अर्पित करते हैं। विष्णु सहस्रनाम, श्रीहरि स्तोत्र और गीता पाठ का भी विशेष महत्व माना जाता है।

देवशयनी एकादशी 

आषाढ़ मास में आने वाली देवशयनी एकादशी को अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और यहीं से चातुर्मास का प्रारंभ होता है। चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। देवशयनी एकादशी के दिन व्रत, पूजा और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है। देशभर के प्रमुख विष्णु मंदिरों में इस अवसर पर विशेष आयोजन किए जाते हैं।

दान-पुण्य और साधना का महीना

आषाढ़ मास को दान, तप, जप और धार्मिक साधना के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान अन्न, वस्त्र, जल, छाता और जरूरतमंदों को आवश्यक वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। कई श्रद्धालु पूरे महीने नियमित रूप से व्रत, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धर्माचार्यों के अनुसार यह महीना आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है। भगवान विष्णु की भक्ति और सत्कर्मों के माध्यम से व्यक्ति मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त कर सकता है।

मंदिरों में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़

आषाढ़ मास के प्रारंभ के साथ ही विष्णु और कृष्ण मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। सुबह और शाम आरती तथा धार्मिक आयोजनों का क्रम शुरू हो गया है। कई स्थानों पर कथा, प्रवचन और सामूहिक भजन कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है।
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