संस्कृति की जीत : छत्तीसगढ़ की अनमोल विरासत को राष्ट्रीय मंच, रामनामी समाज पर बनी डॉक्यूमेंट्री ने जीता पुरस्कार
छत्तीसगढ़ की रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान मिला है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे प्रदेश की लोक संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।
कीर्तिमान डेस्क
20 Jul 2026, 09:25 AM
रायपुर
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिली है। रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान मिला है। इस उपलब्धि से प्रदेश की लोक संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का गौरव बढ़ा है। डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ में छत्तीसगढ़ के रामनामी समुदाय की आस्था, जीवनशैली और सदियों पुरानी परंपराओं को दर्शाया गया है। फिल्म ने इस अनूठी सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया के सामने प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला बड़ा सम्मान
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार मिलने के बाद छत्तीसगढ़ में खुशी का माहौल है। यह सम्मान प्रदेश की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय मंच पर मिली बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का सम्मान।
विष्णु देव साय ने दी बधाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने वाला है।
श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनामी समाज की परंपरा श्रद्धा, समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण है। इस डॉक्यूमेंट्री ने इस विरासत को प्रभावी रूप से प्रस्तुत कर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती दी है।
लोक संस्कृति को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान
सीएम साय ने विश्वास जताया कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, जनजातीय और लोक समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह उपलब्धि प्रदेश की विविध संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने में मदद करेगी।