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रायपुर में 1.25 करोड़ की ठगी का मामला
रायपुर में 1.25 करोड़ की ठगी का मामला
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भाई ने बहन-जीजा को लगाया 1.25 करोड़ का चूना, फर्जी दस्तखत कर फर्म से निकाला

रायपुर में भाई-भाभी पर बहन और जीजा से कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 1.25 करोड़ रुपये ठगने का आरोप है। फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें पार्टनरशिप फर्म से बाहर करने का भी आरोप लगा है। तेलीबांधा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कीर्तिमान न्यूज
07 Aug 2026, 08:06 AM
रायपुर
जिस रिश्ते पर आंख मूंदकर भरोसा किया जाता है, उसी सगे भाई ने अपनी बहन के भरोसे का सौदा कर डाला। व्यापार में दो गुने मुनाफे और हिस्सेदारी का सपना दिखाकर एक भाई ने अपनी ही बहन और जीजा से 1.25 करोड़ रुपये ठग लिए। बात सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं रही, शातिर भाई ने फर्जी दस्तखत के जरिए दंपती को बिना बताए फर्म से भी बेदखल कर दिया। अब मामला थाने पहुंचा है और तेलीबांधा पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की गंभीर धाराओं में अपराध कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, नागपुर के लॉ कॉलेज स्क्वायर की रहने वाली 43 वर्षीय शिवांगी गर्ग, जो पेशे से एक साइकोलॉजिकल काउंसलर हैं, ने अपने ही सगे भाई शुभम सिंघल और भाभी जया सिंघल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। 

बिजनेस बढ़ाने निवेश के लिए किया राजी

रायपुर निवासी शुभम और जया यहां 'अधिराज सीमेंट' और 'अधिराज ट्रेडलिंक' नाम से पार्टनरशिप फर्म चलाते हैं। साल 2020 में शुभम और जया ने बिजनेस का दायरा बढ़ाने और तगड़ा रिटर्न देने का दावा करते हुए शिवांगी और उनके पति को निवेश के लिए राजी किया। भाई पर भरोसा करके दंपती ने अलग-अलग किस्तों में नगद और ऑनलाइन माध्यम से करीब 1.25 करोड़ रुपये लगा दिए। 

कुछ महीनों दिया प्रॉफिट का हिस्सा 

शुरुआत में आरोपियों ने भरोसा कायम रखने के लिए कुछ महीनों तक प्रॉफिट का हिस्सा (लाभांश) उनके खाते में भेजा, ताकि किसी तरह का शक न हो। जब शिवांगी ने अपनी मूल रकम वापस मांगनी शुरू की, तो चालबाजी का नया दौर शुरू हुआ। 4 अप्रैल 2025 को कागजों पर दंपती को दोनों फर्मों में भागीदार बना दिया गया और उसी दिन शुभम ने खुद को कागजों में इस्तीफा देते हुए अलग दिखा दिया। इसके कुछ समय बाद मुनाफा देना पूरी तरह बंद कर दिया गया। 

पाटनरशिप डीड में किए फर्जी हस्ताक्षर 

जनवरी 2026 में जब रायपुर में एक पारिवारिक बैठक हुई, तो रकम जल्द लौटाने का झूठा दिलासा भी दिया गया। शक होने पर शिवांगी गर्ग ने 'रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स' से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत संबंधित दस्तावेज निकाले। दस्तावेज सामने आते ही उनके होश उड़ गए। पता चला कि 6 मार्च और 6 अप्रैल 2026 की पार्टनरशिप डीड में उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे और उन्हें दोनों फर्मों से 'रिटायर' (सेवानिवृत्त) घोषित कर दिया गया था। 

फर्जीवाड़े का सच सामने आने के बाद मामला दर्ज 

शिवांगी का साफ कहना है कि इन दोनों तारीखों पर वे रायपुर में मौजूद ही नहीं थीं। फर्जीवाड़े का पूरा सच सामने आने के बाद पीड़िता की शिकायत पर तेलीबांधा थाना पुलिस ने आरोपी शुभम सिंघल और जया सिंघल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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