भारत और रूस अपने लंबे रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की तैयारी में हैं। दोनों देश राजनयिक संबंधों के 80 साल पूरे होने के मौके पर व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और रोजगार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा है कि भारत और रूस का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इसके साथ ही रूस में एक लाख से अधिक भारतीयों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम चल रहा है।
80 साल के रिश्ते को खास बनाने की तैयारी
भारतीय राजदूत विनय कुमार ने बताया कि भारत और रूस 2027 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के 80 वर्ष पूरे करेंगे। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए दोनों देशों में आर्थिक, व्यापारिक, विज्ञान एवं तकनीक, संस्कृति और जनसंपर्क से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने रिश्तों को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।व्यापार बढ़ाने पर दोनों देशों का फोकस
भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ाने को लेकर कई क्षेत्रों में संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। भारतीय राजदूत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य तय किया है। दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र, परमाणु परियोजनाओं, तकनीक, कृषि और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। रूस में चल रही कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना भी दोनों देशों के सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है।
रूस में बढ़ेंगे भारतीयों के लिए रोजगार के अवसर
रूस में भारतीय कुशल कामगारों की मांग लगातार बढ़ रही है। भारतीय राजदूत के अनुसार, कुछ साल पहले रूस में करीब 10 हजार से 15 हजार भारतीय कामगार थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर एक लाख से अधिक हो चुकी है। आने वाले वर्षों में रूस में भारतीय श्रमिकों की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। निर्माण, तकनीकी सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में भारतीय युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर खुल सकते हैं।यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ी विदेशी कामगारों की जरूरत
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस में विदेशी कामगारों की मांग में इजाफा हुआ है। हालांकि, इस दौरान भारतीय नागरिकों के युद्ध क्षेत्र से जुड़े मामलों ने चिंता भी बढ़ाई है। कुछ मामलों में युवाओं को पैसे और नौकरी का लालच देकर युद्ध में शामिल किए जाने की खबरें सामने आई थीं। भारत सरकार लगातार अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है और विदेशों में रोजगार के अवसरों के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रही है।
ब्रिक्स बैठक में रूस की भागीदारी की उम्मीद
भारतीय राजदूत विनय कुमार ने आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूस की सक्रिय भागीदारी की उम्मीद भी जताई है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के मंच पर दोनों देश बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अपने द्विपक्षीय रिश्तों को भी मजबूत कर रहे हैं। भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी दोस्ती अब व्यापार और रोजगार के नए अध्याय की ओर बढ़ती नजर आ रही है। आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होने की संभावना है।