महासमुंद जिले के विकासखंड महासमुंद अंतर्गत ग्राम गोंडपाली की कृषक भारती बंसल ने खेती में बदलाव करते हुए आधुनिक उद्यानिकी फसल ग्राफ्टेड टमाटर की खेती शुरू की है। परंपरागत धान की खेती से हटकर नई तकनीक अपनाने से उनकी कृषि आय में बढ़ोतरी हुई है।
स्नातक शिक्षित कृषक भारती बंसल ने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत ग्राफ्टेड बैगन टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन कार्यक्रम से जुड़कर उन्नत तकनीक से टमाटर उत्पादन शुरू किया। उन्होंने खेती में आधुनिक तरीकों को अपनाकर अपनी फसल को बेहतर बनाने का प्रयास किया।
उद्यान विभाग के मार्गदर्शन से मिली मदद
उद्यान विभाग महासमुंद के मार्गदर्शन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना वर्ष 2025-26 के तहत भारती बंसल को ग्राफ्टेड टमाटर की खेती के लिए 30 हजार रुपए का अनुदान डीबीटी के माध्यम से दिया गया। इस सहायता से उन्होंने आधुनिक तकनीक के साथ टमाटर उत्पादन शुरू किया।
धान की जगह टमाटर की खेती का लिया फैसला
भारती बंसल के पास 0.40 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है। पहले वह इस जमीन पर पारंपरिक तरीके से धान की खेती करती थीं। लेकिन धान में अपेक्षाकृत कम उत्पादन और अधिक लागत को देखते हुए उन्होंने खेती में बदलाव करने का निर्णय लिया और ग्राफ्टेड टमाटर की खेती को अपनाया।
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से बेहतर हुआ उत्पादन
टमाटर की खेती में भारती बंसल ने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया। इससे पानी की बचत के साथ फसल प्रबंधन आसान हुआ और पौधों की बेहतर देखभाल हो सकी। आधुनिक तरीकों के कारण उत्पादन में भी सुधार देखने को मिला।
106 क्विंटल टमाटर उत्पादन से मिला लाभ
भारती बंसल के अनुसार ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से उन्हें करीब 106 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। टमाटर का विक्रय मूल्य लगभग 20 रुपए प्रति किलोग्राम रहा। इस फसल में करीब 75 हजार रुपए की लागत आई।
खर्च निकालने के बाद 1.37 लाख रुपए का मुनाफा
टमाटर बिक्री से प्राप्त आय में से सभी खर्च घटाने के बाद भारती बंसल को लगभग 1 लाख 37 हजार रुपए का लाभ हुआ। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक से खेती करने से उन्हें बेहतर आमदनी मिली है और वह इस नई पद्धति से काफी संतुष्ट हैं।
किसानों के लिए बनी प्रेरणा
भारती बंसल की सफलता यह दिखाती है कि पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। नई तकनीक, सही प्रबंधन और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।