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वसुंधरा परियोजना से डिजिटल होते जमीन रिकॉर्ड
वसुंधरा परियोजना से डिजिटल होते जमीन रिकॉर्ड
राज्य सरकार

राजस्व सेवाओं में बड़ा बदलाव : छत्तीसगढ़ के पुराने भूमि दस्तावेज होंगे डिजिटल, घर बैठे मिलेगी सुविधा

छत्तीसगढ़ सरकार ‘वसुंधरा’ परियोजना के तहत प्रदेश के सभी पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों को डिजिटल करने जा रही है। इस योजना से खसरा, बी-1 और अन्य भूमि दस्तावेज नागरिकों को ऑनलाइन और व्हाट्सएप के माध्यम से आसानी से उपलब्ध होंगे। करीब 12.89 करोड़ पृष्ठों के डिजिटलीकरण के साथ राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता और तेजी आएगी।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 30 Jul 2026, 05:43 PM · अपडेट: 31 Oct 2026, 03:48 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
​छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा प्रदेश के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। 'वसुंधरा' (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों और तहसीलों के पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जाएगा। 
छत्तीसगढ़ में 'वसुंधरा परियोजना' के तहत राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे खसरा, बी-1 और ऋण पुस्तिका जैसे भूमि दस्तावेज कुछ ही सेकंड में व्हाट्सएप और ऑनलाइन माध्यमों से सुरक्षित व पारदर्शी रूप से नागरिकों को मिल रहे हैं।

​दंतेवाड़ा का सफल मॉडल बना प्रेरणा

​इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव दंतेवाड़ा जिले में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए गए मॉडल पर रखी गई है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया।

12.89 करोड़ पृष्ठों के डिजिटलीकरण का विशाल लक्ष्य

​दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग के आधार पर अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।

​मजबूत वित्तीय संरचना और चरणबद्ध समयसीमा

इस विशाल परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की कुल एकमुश्त पूंजीगत लागत (CAPEX) और 50 लाख रूपए प्रति वर्ष का परिचालन व्यय (OPEX) तय किया गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की DILRMP 3.0 योजना से की जाएगी। योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

आधुनिकतम तकनीक से लैस और पूरी तरह सुरक्षित

​'वसुंधरा' परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसमें आधुनिकतम तकनीकों का समावेश है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड भी पलक झपकते ही खोजे जा सकेंगे। वहीं अभिलेखों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक QR व बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी। दस्तावेजों के ऑनलाइन होने से रिकॉर्ड में किसी भी तरह के अवैध बदलाव या छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म होना।

​नागरिकों को मिलेगी दफ्तरों के चक्करों से आजादी

​इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वर्तमान में नकल प्राप्ति में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा और यह सेवा नागरिकों को 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। घर बैठे कुछ ही पलों में जमीन के जरूरी दस्तावेज प्राप्त किया जा सकेगा । नागरिक अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। सुगम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार का यह नवाचार न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस और सुशासन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगा।
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