देश के शिक्षा क्षेत्र और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जारी सियासी हलचल के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को देश के नए शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है और प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। गौरतलब है कि प्रह्लाद जोशी के पास पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा (न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी) जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार है।
पहले भी बड़े विभागों की संभाल चुके है कमान
कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांचवीं बार सांसद चुने गए प्रह्लाद जोशी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता है। संगठन से लेकर सरकार तक में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए ही उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले मोदी सरकार 2.0 में भी वे कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्रालय जैसे बड़े विभागों की कमान कुशलता से संभाल चुके हैं।
जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध भी समाप्त
वर्तमान में वे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के अध्यक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय में हुए इस बड़े बदलाव के साथ ही नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन भी समाप्त हो गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं:
अधिकारियों पर कार्रवाई: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।
सख्त कानून की तैयारी: मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक और धांधली को रोकने के लिए एक नए कड़े विधेयक (Bill) को मंजूरी दे दी है। यह बिल सोमवार को संसद के पटल पर रखा जाएगा।