छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक कम पढ़े-लिखे ग्रामीण को उसकी जमीन के मुआवजे के नाम पर करीब 49.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने किसान के भोलेपन और कागजी कार्रवाई की अज्ञानता का फायदा उठाते हुए इस पूरी वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल, घरघोड़ा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दरअसल, यह पूरा मामला ग्राम तिलाईपाली बिच्छीनारा का है। यहां रहने वाले 35 वर्षीय अमीर कुमार राठिया की जमीन और मकान एनटीपीसी तलाईपाली कोयला खनन परियोजना के तहत अधिग्रहित हुए थे। इसके एवज में उन्हें सरकार की तरफ से भारी-भरकम मुआवजा मिलना था।
कम पढ़े लिखे होने का उठाया फायदा
अमीर सिर्फ पांचवीं तक पढ़े हैं और बैंक के कामकाज से पूरी तरह अनजान थे। इसी अज्ञानता का फायदा गांव के ही खगेश्वर गुप्ता ने उठाया। कुछ महीने पहले उसने अमीर के पास जाकर मुआवजे का सारा कागजी काम आसानी से निपटाने का लालच दिया। अमीर ने उसकी बातों पर भरोसा कर लिया और अपनी पंजाब नेशनल बैंक (रायकेरा शाखा) की पासबुक उसे सौंप दी।
आरोपियों ने बच्चों के खातों में पैसा डालने का दिया सुझाव
8 जून की सुबह खगेश्वर कार लेकर अमीर के घर पहुंचा और खुशखबरी दी कि मुआवजे की रकम खाते में आ गई है। उसने सुझाव दिया कि यह पैसा बच्चों के खातों में जमा कर देना चाहिए। इसके बाद अमीर अपने बेटे विनोद (17), बेटी अनिता (16) और एक अन्य रिश्तेदार के साथ बैंक पहुंचे। वहां खगेश्वर का साथी प्रदीप गुप्ता भी पहले से मौजूद था। बैंक में दोनों आरोपियों ने बड़ी ही चालाकी से अधिकारियों से बात कर अमीर के नाम पर चेकबुक जारी करवा ली। अमीर को झांसा दिया गया कि उनके बेटे और बेटी के खाते में 5-5 लाख रुपये जमा किए जाएंगे और बाकी रकम जॉइंट अकाउंट में सुरक्षित रखी जाएगी।अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर की रकम
इसी धोखे में रखकर उन्होंने अमीर से कई ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए। इस शातिर ठगी का खुलासा तब हुआ जब 10 जून को अमीर पासबुक में एंट्री कराने दोबारा बैंक पहुंचे। पासबुक का प्रिंट देखते ही उनके होश उड़ गए। उन्हें पता चला कि 3 जून को एनटीपीसी की तरफ से उनके खाते में 69 लाख 64 हजार 618 रुपये जमा हुए थे। लेकिन 8 जून को आरोपियों ने उनके बच्चों के खाते में पैसे डालने की आड़ में एक बहुत बड़ी रकम अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दी थी।
पासबुक की एंट्री के मुताबिक
प्रदीप गुप्ता ने अपने पिता मोतीलाल गुप्ता के खाते में 25 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
खगेश्वर गुप्ता ने अपने भाई जगदीश गुप्ता के खाते में 24 लाख 50 हजार रुपये डाल दिए।
ठगी का अहसास होने पर जब अमीर और उसके परिवार ने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे, तो वे लगातार टालमटोल करते रहे। जब लगा कि पैसे वापस नहीं मिलेंगे, तो थक-हारकर पीड़ित ने घरघोड़ा थाने में न्याय की गुहार लगाई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खगेश्वर गुप्ता और प्रदीप गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस बैंक खातों के लेनदेन की बारीकी से जांच कर रही है और सबूत जुटाए जा रहे हैं।