कहां-कहां हुआ हाथियों का तांडव?
मिली जानकारी के अनुसार, हाथियों का कहर जिले के अलग-अलग वन क्षेत्रों में देखने को मिला:
रायगढ़ वन मंडल: तमनार रेंज के सामारूमा गांव में हाथियों ने 5 किसानों की खड़ी फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। वहीं घरघोड़ा रेंज के कमतरा गांव में भी एक किसान का धान का खेत पूरी तरह रौंद दिया गया।
धरमजयगढ़ वन मंडल: नलकालो क्षेत्र में कुसुम और श्रवण कुमार नामक किसानों के खेतों में भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा प्रेमनगर और मेढरमार इलाके में हाथियों की आवाजाही से किसान विजय राय, चैतराम, रत्थूलाल और दिलीप की धान की फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं।
लैलूंगा और गमेकेला क्षेत्र: यहां भी हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया, जिससे किसान प्रशांत भगत, खेमचंद, मूसतराम और लालोनी शर्मा को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।
जिले में घूम रहा 130 हाथियों का बड़ा कुनबा
वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो इस समय पूरे जिले में दहशत की मुख्य वजह हाथियों का एक विशाल कुनबा है। रायगढ़ और धरमजयगढ़ के जंगलों में फिलहाल 130 हाथी डेरा डाले हुए हैं। इस कुनबे में 39 नर, 62 मादा और 29 नन्हे शावक शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी के कारण वनांचल और सीमावर्ती गांवों के लोगों में डर और अनहोनी का साया मंडरा रहा है। हालांकि, स्थिति पर काबू पाने के लिए वन विभाग का 'हाथी मित्र दल' और ट्रेकर्स दिन-रात हाथियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहे हैं।गांव-गांव में मुनादी, रात के समय अलर्ट पर ग्रामीण
हाथियों के साथ इंसानी टकराव और किसी भी तरह की जनहानि को रोकने के लिए वन अमला पूरी तरह अलर्ट मोड़ में आ गया है। प्रभावित और संवेदनशील गांवों में ढोल-नगाड़ों और लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी कराई जा रही है।
वन अधिकारियों ने ग्रामीणों से सख्त अपील की है कि:
शाम ढलने के बाद या देर रात कोई भी अकेला जंगल की तरफ न जाए।
हाथी प्रभावित इलाकों और खेतों की ओर जाने से बचें।
हाथियों के दिखने पर उन्हें छेड़ने या भगाने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

