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Baby elephant rescued in Raigarh (Image Source: social media)
Baby elephant rescued in Raigarh (Image Source: social media)
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Wildlife Rescue: झुंड ने ठुकराया, पैर में चोट और कमजोरी से जूझ रहे हाथी के बच्चे को मिला नया आशियाना

Wildlife Rescue: रायगढ़ के धरमजयगढ़ वन मंडल में झुंड से बिछड़े नन्हे हाथी को परिवार से मिलाने की कोशिश असफल रही। कमजोर स्वास्थ्य और पैर में चोट के बाद वन विभाग ने उसे रमकोला रेस्क्यू सेंटर भेज दिया।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 15 Sep 2026, 08:51 AM · अपडेट: 29 Oct 2026, 04:10 PM
रायगढ़
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Wildlife Rescue: रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल अंतर्गत बोरो परिक्षेत्र से एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। ग्राम चाल्हा बाजार में अपने दल से भटके एक नन्हे हाथी (शावक) को उसके झुंड से मिलाने की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। आखिरकार, उसकी सुरक्षा और गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए वन विभाग ने उसे रेस्क्यू कर सरगुजा स्थित रमकोला हाथी रेस्क्यू सेंटर भेज दिया है। घटना की शुरुआत 9 सितंबर को हुई, जब चाल्हा गांव के पास ग्रामीणों ने एक छोटे हाथी को अकेले भटकते देखा। सूचना मिलते ही स्थानीय वन अमला और हाथी मित्र दल मौके पर पहुंचा। 

नन्हा हाथी निराश वापस लौटा 

10 सितंबर को जब ट्रैकिंग टीम को पता चला कि शावक का मूल झुंड 7 से 8 किलोमीटर दूर है, तो 11 और 12 सितंबर को उसे परिवार से मिलाने के प्रयास किए गए। हालांकि, कुदरत का नियम कहें या हाथियों का व्यवहार—झुंड ने इस मासूम शावक को दोबारा स्वीकार करने से मना कर दिया और नन्हा हाथी निराश होकर वापस लौट आया। झुंड से अलग होने के बाद शावक खेतों के आसपास ही घूमता रहा। इसे देखने के लिए चाल्हा और बताती गांव के लोगों का तांता लग गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तुरंत ग्रामीणों की बैठक बुलाई और सुरक्षा के लिहाज से उन्हें शावक से दूरी बनाए रखने की समझाइश दी।

पैर में चोट और शरीर में आई कमजोरी

13 सितंबर को कानन पेंडारी बिलासपुर से वन्यप्राणी शल्यज्ञ (सर्जन) और अनुभवी महावतों की टीम मौके पर पहुंची। स्वास्थ्य जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि:

  • शावक के बाएं पैर में गंभीर चोट है।

  • लगातार भटकने और खान-पान सही न मिलने से वह काफी कमजोर हो चुका है।

  • भीड़ के लगातार दबाव और शारीरिक स्थिति को देखते हुए उसे खुले जंगल में छोड़ना उसकी जान के लिए जोखिम भरा था।

महावतों ने सुरक्षित शावक का किया रेस्क्यू

विशेषज्ञ डॉक्टरों ने शावक की नाजुक हालत को देखते हुए उसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर रेस्क्यू सेंटर भेजने की लिखित सिफारिश की। इसके बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 11 (1) (क) और 12 (खख) के तहत मुख्य वन्यजीव संरक्षक (CWLW) से विधिवत अनुमति ली गई। सोमवार को अचानकमार टाइगर रिजर्व, कानन पेंडारी और रमकोला के पशु चिकित्सकों—डॉ. पीके चंदन और डॉ. अजीत पांडेय की अगुवाई में महावतों की टीम ने सुरक्षित तरीके से शावक का रेस्क्यू किया। 

योगदान रहा सराहनीय 

जरूरी डॉक्टरी देखभाल के बाद उसे एक विशेष वाहन से सरगुजा के रमकोला रेस्क्यू सेंटर रवाना कर दिया गया। यह पूरा संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन वन मंत्री केदार कश्यप और वरिष्ठ वन अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में पूरा हुआ। अभियान को सफल बनाने में धरमजयगढ़ डीएफओ, एलीफेंट रिजर्व सरगुजा के डिप्टी डायरेक्टर, बोरो वन परिक्षेत्राधिकारी, उड़नदस्ता टीम, हाथी मित्र दल और चाल्हा गांव के स्थानीय निवासियों का सराहनीय योगदान रहा।
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