ग्वालियर में सामने आए इस मामले ने POCSO जैसे सख्त कानूनों के इस्तेमाल और पुलिस जांच की निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी है। अदालत ने CCTV फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को बरी कर दिया और तत्कालीन जांच अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मामला जून 2023 का है। थाटीपुर थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय नाबालिग ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 10 जून 2023 को उसके चाचा ने घर में अकेला पाकर उसके साथ गलत काम करने की कोशिश की।
13 साल की नाबालिग ने लगाए थे गंभीर आरोप
इसके अलावा चाचा के दोस्त एड संकेत साहू पर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। नाबालिग की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 अगस्त 2023 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामले में दोनों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। पुलिस ने मामले में जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर दी थी।
कोर्ट में CCTV फुटेज ने बदल दी पूरी कहानी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश किए गए CCTV फुटेज ने जांच की दिशा बदल दी। फुटेज में सामने आया कि जिस समय घटना होने की बात कही गई थी, उस दौरान नाबालिग घर से बाहर नहीं गई थी। वहीं आरोपी चाचा भी अपने कमरे से बाहर नहीं आए थे। CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने माना कि अभियोजन की कहानी उपलब्ध सबूतों से मेल नहीं खाती।सबूतों के अभाव में आरोपियों को मिली राहत
कोर्ट ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ नहीं, बल्कि पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर बरी कर दिया। अदालत ने मामले की जांच में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन सब इंस्पेक्टर बलराम मांझी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। सुनवाई के दौरान सामने आया कि दोनों भाइयों के बीच पहले से मकान और पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। आरोपी ने पहले ही पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर उन्हें फंसाए जाने की आशंका जताई थी।