जन्मदिन बना सेवा का पर्व : महासमुंद में शिक्षिका की अनूठी पहल, बेटे के जन्मदिन पर बच्चों को दिया उपहार
महासमुंद के शासकीय अभ्यास प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक डेमेश्वरी गजेंद्र ने अपने पुत्र सार्थक गजेंद्र के जन्मदिन पर विद्यालय के बच्चों को हाउस ड्रेस वितरित की। वह पिछले कई वर्षों से अपने पुत्र का जन्मदिन समाजसेवा के रूप में मनाते हुए हर साल एक माह का वेतन बच्चों के कल्याण पर खर्च करती हैं।
कीर्तिमान डेस्क
26 Jul 2026, 04:08 PM
महासमुंद
किसी का जन्मदिन केक काटकर और उपहार लेकर मनाया जाता है, लेकिन जब किसी बच्चे का जन्मदिन सैकड़ों बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बनकर उतर आए, तो वह दिन सचमुच यादगार बन जाता है। ऐसा ही भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्य शासकीय अभ्यास प्राथमिक शाला, महासमुंद में देखने को मिला, जहां प्रधान पाठक डेमेश्वरी गजेंद्र ने अपने पुत्र सार्थक गजेंद्र के जन्मदिन के अवसर पर विद्यालय के बच्चों के लिए आकर्षक हाउस ड्रेस का वितरण किया।
उल्लेखनीय है कि डेमेश्वरी गजेंद्र पिछले कई वर्षों से अपने पुत्र का जन्मदिन समाजसेवा और बच्चों की खुशियों के साथ मनाती आ रही हैं। हर वर्ष वह अपनी एक माह की सैलरी विद्यालय के बच्चों के लिए समर्पित करती हैं। इससे पहले भी वह बच्चों को स्कूल बैग, पेंसिल बॉक्स, बेल्ट, कॉपी-किताबों सहित अन्य आवश्यक स्टेशनरी सामग्री उपलब्ध करा चुकी हैं। इस वर्ष उन्होंने बच्चों में हाउस ड्रेस का वितरण कर इस सेवा परंपरा को आगे बढ़ाया है।
नई ड्रेस पाकर खिल उठे बच्चों के चेहरे
नई हाउस ड्रेस पहनते ही बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी। पूरे विद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल था। बच्चों के चेहरे पर नई ड्रेस पाने की चमक साफ दिखाई दे रही थी। विद्यालय के शिक्षकों और अभिभावकों ने भी इस पहल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उनका कहना था कि जब शिक्षक स्वयं समाज के प्रति ऐसी संवेदनशील सोच रखते हैं, तब बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ जीवन के वास्तविक संस्कार भी मिलते हैं।
समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का दिन
मेरे लिए स्कूल के सभी बच्चे भी मेरे अपने बच्चों जैसे हैं। बेटे सार्थक के जन्मदिन पर जब उसके साथ विद्यालय के सभी बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठते हैं, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ा सुकून और सबसे बड़ा उपहार होता है। जन्मदिन तभी सार्थक है, जब उसकी खुशियां समाज के अन्य बच्चों तक भी पहुंचें। — डेमेश्वरी गजेंद्र, प्रधान पाठक
बच्चों की खुशियां ही मेरा सबसे बड़ा उपहार
मेरे जन्मदिन पर जब स्कूल के बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठते हैं, तो मुझे लगता है कि इससे बड़ा कोई गिफ्ट नहीं हो सकता। मम्मी हर साल जो सेवा का काम करती हैं, उससे मुझे दूसरों की मदद करने और समाज के लिए कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है। मैं चाहता हूं कि यह परंपरा आगे भी इसी तरह जारी रहे और हर जन्मदिन किसी न किसी के चेहरे पर मुस्कान लेकर आए। — सार्थक गजेंद्र
यह मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण
प्रधान पाठक डेमेश्वरी गजेंद्र की यह पहल आर्थिक सहयोग के साथ शिक्षा में मानवीय मूल्यों का सशक्त संदेश भी है। अपने पुत्र के जन्मदिन पर हर वर्ष एक माह का वेतन बच्चों के कल्याण के लिए समर्पित करना वास्तव में प्रेरणादायक है। ऐसे कार्य बच्चों में सेवा, समानता और संवेदनशीलता के संस्कार विकसित करते हैं तथा समाज को भी सकारात्मक दिशा देने का काम करते हैं। — जीएल सिन्हा, प्राचार्य