नवा रायपुर स्थित चर्चित और बेहद खतरनाक 'ब्लू वॉटर खदान' में थमते नहीं हादसों को देखते हुए आख़िरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। लगातार जा रही मासूमों और युवाओं की जान के बाद अब इस पूरे इलाक़े को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की तैयारी कर ली गई है। आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने साफ़ किया है कि लोगों को इस जानलेवा खदान से दूर रखने के लिए इसके चारों ओर मज़बूत फेंसिंग कराई जाएगी, ताकि कोई भी पानी के नज़दीक न जा सके।
खदान को तैरकर पार करने की लगी थी शर्त
हालिया मामला मौदहापारा निवासी आदिल खान का है, जो अपने दोस्तों के साथ यहाँ पहुँचा था। दोस्तों के बीच खदान को तैरकर पार करने की शर्त लगी, और इसी दुस्साहस में आदिल गहरे पानी में समा गया। घटना के बाद से ही राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम तलाश में जुटी है। बाहर से बुलाई गई विशेषज्ञ टीम भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई है। ख़बरों के मुताबिक़, इस खदान की गहराई लगभग 400 फीट है, जबकि गोताखोर महज 60 फीट तक ही नीचे जा पा रहे हैं। अत्यधिक गहराई और पानी का दबाव बचाव कार्य में बड़ी बाधा बन रहा है।
9 सालों का दर्दनाक इतिहास: आदिल का शव मिलते ही मौतों का आँकड़ा होगा 10
ब्लू वॉटर खदान का इतिहास बेहद डरावना रहा है। साल 2017 से लेकर अब तक यहाँ 9 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं:
2017: एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की डूबने से मौत।
मई 2019: एक युवक गहरे पानी में समाया।
मार्च 2023: दो दोस्तों की एक साथ डूबने से मौत।
जून 2023: नदीम, फैजल और शहबाज - तीन युवाओं ने एक साथ दम तोड़ा।
अक्टूबर 2025: दो स्कूली छात्र हादसे का शिकार बने।
खूबसूरती के छलावे में डालते है जान जोखिम में
यदि आदिल खान का शव बरामद होता है, तो इस ख़ूनी खदान में जान गँवाने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी। बारिश और ठंड के मौसम में इस खदान का पानी बेहद साफ़ और गहरा नीला नज़र आता है। इसी ख़ूबसूरती के छलावे में आकर युवा यहाँ खिंचे चले आते हैं और रील्स बनाने, स्विमिंग करने या स्टंट के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं। प्रशासन का कहना है कि अब किसी को भी इस क्षेत्र में भटकने नहीं दिया जाएगा। फेंसिंग के साथ-साथ यहाँ चेतावनी बोर्ड और कड़े सुरक्षा इंतज़ाम लागू किए जा रहे हैं।