EOW Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने सोमवार, 5 अक्टूबर को कोर्ट में छठी पूरक आरोप पत्र दाखिल की। जांच एजेंसी की चार्जशीट में अवैध वसूली की रकम के लेन-देन को लेकर कई अहम दावे किए गए हैं। EOW के मुताबिक, कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूली गई करीब 104 करोड़ रुपए की रकम पर कांग्रेस के रायपुर स्थित राजीव भवन तक पहुंची थी। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि इस रकम का एक हिस्सा तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रहे रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाया गया। हालांकि, ये सभी दावे जांच एजेंसी द्वारा कोर्ट में पेश किए गए आरोप पत्र का हिस्सा हैं और इन पर अंतिम फैसला न्यायालय को करना है।
जुलाई 2020 में बदली थी ई-परमिट व्यवस्था
EOW की जांच के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की ई-परमिट व्यवस्था में बदलाव किया गया था। नई व्यवस्था में जिला खनिज अधिकारी (DMO) की मैन्युअल मंजूरी को जरूरी कर दिया गया। एजेंसी का कहना है कि इसके बाद बिना डीओ जारी हुए कोयले के परिवहन में परेशानी आने लगी और इसी स्थिति का फायदा उठाकर कथित तौर पर प्रति टन 25 रुपए की अवैध लेवी वसूली जाने लगी। चार्जशीट में सूर्यकांत तिवारी को इस वसूली व्यवस्था का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। EOW का आरोप है कि इस पूरी व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम का भी इस्तेमाल किया गया।
शेल कंपनियों और फर्जी लेन-देन का आरोप
जांच एजेंसी ने अवैध रूप से जुटाई गई रकम को छिपाने के लिए कई लोगों और कंपनियों के इस्तेमाल का भी दावा किया है। चार्जशीट के मुताबिक, रानू साहू के भाई पीयूष साहू, सौम्या चौरसिया के संबंधी अनुराग चौरसिया के अलावा कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल और जोगेंदर सिंह की भूमिका की जांच की गई। EOW का कहना है कि कथित रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाने के लिए फर्जी लोन, राइस मिल और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के अनुसार, इस प्रक्रिया में 10 करोड़ रुपए से अधिक की बैंक एंट्री सामने आई है।डायरी और WhatsApp चैट से मिले अहम सुराग
मामले की जांच में बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। EOW ने हैंडरिटन डायरी, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और आरोपियों के बीच WhatsApp तथा अन्य मैसेंजर एप पर हुई बातचीत को साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, एक डायरी में ‘D’, ‘RP’, ‘JP’, ‘चंद्रा’, ‘भगत’, ‘C PARTY’ और ‘MU’ जैसे कोडवर्ड दर्ज मिले। EOW का दावा है कि इन कोडवर्ड और वित्तीय लेन-देन के बीच संबंधों की भी जांच की गई है। कोल लेवी मामले में अब तक सामने आई जांच के आधार पर EOW ने कथित अवैध वसूली, रकम के हस्तांतरण और उसे अलग-अलग माध्यमों से छिपाने की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत आरोप लगाए हैं। छठी पूरक चार्जशीट के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान इन आरोपों और साक्ष्यों की जांच होगी।

