केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने त्रि-भाषा नीति के क्रियान्वयन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नई त्रि-भाषा व्यवस्था लागू नहीं होगी। यानी इस बैच के छात्रों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी।
सीबीएसई ने मौजूदा कक्षा 9 के विद्यार्थियों को भी एक बार की विशेष राहत दी है। इन छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, लेकिन वे दो विदेशी भाषाओं के साथ एक भारतीय भाषा का चयन कर सकते हैं। इससे पहले बोर्ड ने 1 जुलाई से कम से कम दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने की घोषणा की थी, जिसे लेकर कई अभिभावकों और छात्रों ने आपत्ति जताते हुए अदालत का रुख किया था।
सीबीएसई ने कहा
सीबीएसई की अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम. सिंह ने बताया कि वर्तमान 10वीं बैच पर नई त्रि-भाषा नीति लागू नहीं की जाएगी। साथ ही कक्षा 7, 8 और 9 के मौजूदा विद्यार्थियों को भी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा से छूट दी गई है। हालांकि, जिन छात्र-छात्राओं ने दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे उन्हें जारी रख सकते हैं, लेकिन उनके लिए एक भारतीय भाषा पढ़ना अनिवार्य रहेगा।
नई गाइडलाइन की प्रमुख बातें
• मौजूदा 10वीं के विद्यार्थियों पर नई त्रि-भाषा नीति लागू नहीं होगी।
• वर्तमान 10वीं बैच को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
• कक्षा 7, 8 और 9 के मौजूदा छात्रों को भी परीक्षा संबंधी छूट मिलेगी।
• दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे छात्र अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
• एक भारतीय भाषा का अध्ययन अनिवार्य रहेगा।
• संशोधित व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होगी।
2028 से शुरू होगी नई बोर्ड परीक्षा व्यवस्था
सीबीएसई के अनुसार, दो-स्तरीय (स्टैंडर्ड और एडवांस्ड) बोर्ड परीक्षा प्रणाली के तहत पहली 10वीं बोर्ड परीक्षा वर्ष 2028 में आयोजित की जाएगी। यह व्यवस्था उन विद्यार्थियों पर लागू होगी जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 में प्रवेश लेंगे। बोर्ड ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि विदेशी भाषा का विकल्प तभी उपलब्ध होगा, जब विद्यार्थी कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर चुके हों। ऐसी स्थिति में विदेशी भाषा को तीसरी भाषा या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुना जा सकेगा। इस प्रावधान का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को बहुभाषी शिक्षा का अवसर प्रदान करना है।