किन दो सुरंगों से बदलेगी इलाके की तस्वीर?
सिंहपोरा-वैलू सुरंग: अनंतनाग-चेनानी कॉरिडोर पर पड़ने वाले करीब 39 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर 10 किलोमीटर लंबी एकतरफा दोहरी सुरंग (Twin-tube Tunnel) बनाई जाएगी।
सुधमहादेव-द्रंगा सुरंग: 13 किलोमीटर लंबे इस हिस्से पर 8 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया जाएगा।
100% केंद्रीय फंड: इन दोनों ही ड्रीम प्रोजेक्ट्स का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। सड़क परिवहन मंत्रालय ने इन्हें अगले 5 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
क्यों पड़ी इन सुरंगों की जरूरत?
NH-244 के जिन इलाकों में ये टनल बनने जा रही हैं, वे भौगोलिक दृष्टि से बेहद कठिन और संवेदनशील हैं। सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी, भूस्खलन (landslides) और खराब मौसम की वजह से यह रास्ता अक्सर हफ्तों बंद रहता था।
बर्फबारी से छुटकारा: सुरंगें बनने के बाद इन खतरनाक ढलाणों और बर्फ प्रभावित रास्तों से बचकर निकला जा सकेगा।
सफर में बचत: जम्मू से कश्मीर घाटी और चेनाब घाटी के बीच की दूरी तो घटेगी ही, साथ ही कई घंटों का सफर भी सिमट जाएगा।
24x7 कनेक्टिविटी: यात्रियों, पर्यटकों और माल ढुलाई वाले वाहनों को बिना किसी रुकावट के सुरक्षित रास्ता मिलेगा।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
इन ऑल-वेदर टनल प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को तो मजबूती मिलेगी ही, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी पहिया तेज घूमेगा:
पर्यटन में उछाल: किश्तवाड़, डोडा और अनंतनाग के खूबसूरत लेकिन अछूते पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच साल भर बनी रहेगी।
व्यापार और कृषि को राहत: स्थानीय किसानों और बागवानों के लिए अपने कृषि उत्पादों (जैसे सेब और केसर) को समय पर मंडी तक पहुंचाना आसान होगा।
आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई: सर्दियों में बर्फबारी के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में होने वाली राशन और जरूरी सामान की किल्लत हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।